संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत (कैथल)। कैलरम गांव निवासी ईश्वर कुंडू को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा ‘मिलेनियर फार्मर ऑफ द ईयर 2025’ अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम देशभर के उन नवीनमेषी किसानों को समर्पित है, जिन्होंने खेती की समस्याओं का समाधान खोजकर कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।
नई दिल्ली के पूसा ग्राउंड में इस कार्यक्रम का सोमवार को आयोजन किया जा रहा है। कैथल से इस सम्मान के लिए केवल ईश्वर कुंडू का चयन किया गया है। छोटे से गांव कैलरम के ईश्वर कुंडू ने कृषि को पूरी तरह जहरमुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है।
उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद ऐसे जैविक उत्पाद विकसित किए, जिनका डंका न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बज रहा है। केवल 10वीं कक्षा तक पढ़े ईश्वर कुंडू ने लगभग एक दशक तक कृषि में शोध और परीक्षण किए, जिससे किसान की लागत कम हुई, पैदावार बढ़ी और उपभोक्ताओं को सुरक्षित, जहरमुक्त भोजन उपलब्ध हुआ।
कुंडू की खोजों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, कृषि विज्ञान केंद्र कैथल और सिंजेंटा जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों ने 6 राज्यों में परीक्षण किया। परिणामस्वरूप पैदावार में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। उनकी पहली खोज को वर्ष 2004 में किसानों ने ‘कमाल’ नाम दिया।
इस नवोनमेषी किसान की उपलब्धियों को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से लेकर रामनाथ कोविंद तक सम्मान दे चुके हैं। इसके अलावा, लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में चार बार उनके उत्पाद की गुणवत्ता और उपयोगिता को दर्ज किया गया है। उनकी खोज पेटेंट गजट में भी प्रकाशित हो चुकी है। ईश्वर कुंडू ने कहा कि खेती घाटे का सौदा नहीं है। हर किसान अपने आप में एक कृषि वैज्ञानिक है। यदि किसान नवाचार और मेहनत के साथ खेती करे तो वह मिलेनियर किसान बन सकता है।