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Kaithal News: स्कूलों में नया सत्र शुरू, विद्यार्थियों को जल्द मिलेंगी पुस्तकें

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कैथल। जिले में सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में अब विद्यार्थियों को इस सत्र में जल्द ही एनसीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध हो जाएंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूलों को शेड्यूल भेज दिया गया है। 20 अप्रैल तक किताबें पहुंच जाएंगी। ये किताबें पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिलेंगी। इस समय सरकारी स्कूलों में दाखिले किए जा रहे हैं। बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिलने से अभिभावक मायूस हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में मार्च माह तक पुस्तकें पहुंच जानी चाहिए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण अप्रैल माह भी निकल रहा है, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे शुरू हो पाएगी। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को दाखिल करवाने को लेकर अभिभावक असमंजस में रहते हैं।
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जानकारी के अनुसार जिले में 594 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से पहली से आठवीं कक्षा तक 66 सरकारी स्कूल हैं। पिछले साल करीब 98 हजार बच्चों ने सरकारी स्कूलों में दाखिल लिया था। विभाग की तरफ से इन बच्चों के लिए लाखों रुपये की पुस्तकें उपलब्ध करवाई गई थी। शिक्षा विभाग की तरफ से जिले में प्राइमरी, मिडिल व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के साथ-साथ आरोही, कस्तूरबा गांधी स्कूल चलाए जा रहे हैं। करीब 20 स्कूलों को अब पीएमश्री स्कूल का दर्जा दिया जा रहा है। अब इन स्कूलों के लिए किताबें भेजने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शेड्यूल भेज दिया गया है। इन स्कूलों को जल्द किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी।
स्कूलों में चल रहा सीआरपी कार्यक्रम

शिक्षा विभाग की तरफ से अब स्कूलों में क्लास रेडिनेस यानि सीआरपी कार्यक्रम चल रहा है। यह 15 अप्रैल तक चलेगा। इस कार्यक्रम के तहत जो बच्चे पिछली कक्षाओं में किसी विषय में कमजोर थे, उनकी तैयारी को लेकर यह कार्यक्रम चल रहा है। इस बारे में रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी स्वयं ले रहे हैं।
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वर्जन-

विभाग की तरफ से पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को एनसीईआरटी की किताबों को लेकर शेड्यूल भेजा गया है। 20 अप्रैल तक किताबें स्कूलों में पहुंच जाएंगी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी स्कूलों के अध्यापक डोर-टू-डोर जाकर अभिभावकों को बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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रामदिया गागट, जिला शिक्षा अधिकारी, कैथल


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