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Kaithal News: जांच एजेंसी के नाम से कॉल कर ठगी का नया तरीका

Thu, 10 Oct 2024 04:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए नए-नए पैतरें आजमा रहे हैं। साइबर पुलिस को पिछले कुछ समय से ठगों के एक नए तरीके की शिकायतें मिल रही हैं। साइबर ठग आम नागरिकों को किसी इंवेस्टीगेशन एजेंसी संस्था के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कॉल , व्हाट्सएप कॉल करके बड़े पैमाने पर ठगी कर

रहे हैं।

इस तरह के साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। एसपी राजेश कालिया ने कहा कि साइबर ठग विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपनाकर आमजन को साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं। पिछले कुछ समय से एक विशेष प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत देखने में आ रही है, जिसमें आम नागरिकों को किसी जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कॉल/व्हाट्सएप कॉल करके ठगी की जा रही है। एसपी ने कहा कि इसमें साइबर अपराधी आमजन से संपर्क करते हैं। यह कॉल अधिकांशत: +92 (पाकिस्तानी) नंबर या किसी अन्य देश के नंबर (+91 के अतिरिक्त) से आते हैं।
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संदिग्ध व्यक्ति कॉल करके आपको डराते हुए यह कहते हैं कि आपके पैन/आधार कार्ड का उपयोग करके पार्सल भेजा गया है, जिसमें नारकोटिक्स (नशीली) सामग्री है। जालसाज एनसीबी/सीबीआई/एनआईए आदि इंवेस्टीगेशन एजेंसी के अधिकारी के नाम से बदल-बदल कर कभी कॉल, कभी व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा है, जिसमें नारकोटिक्स (नशीली) सामग्री है।

जालसाजों द्वारा कभी आपको कोर्ट फीस देने या जमानत देने के नाम से अथवा आपका नाम केस से हटाने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है। कभी-कभी वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी से बात करने को भी कहते हैं। वीडियो कॉल पर रहते हुए आपको एक फर्जी नोटिस दे दिया जाता है, जिसमें आपको डिजिटल अरेस्ट करते हुए घर में ही रहने को कहा जाता है।

कहा जाता है कि आप स्वयं को किसी कमरे में बंद कर लें व उनके सभी सवालों के जवाब दें। यह भी कहा जाता है कि कैमरे के सामने ही रहना है, कमरे में यदि कोई और आया तो आप दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। धीरे-धीरे आपको और अधिक डराया जाता है और आपकी निजी व खातों सहित विभिन्न इंवेस्टमेंट की जानकारी आपसे ले ली जाती है।

अंत में यह कहकर कि शायद आपको गलत फंसा दिया गया है, आप जांच पूरी होने तक अपना पैसा आरबीआई/भारत सरकार के खाते में जमा कर दें, जो जांच पूरी होने के बाद आपको लौटा दिया जाएगा। इस पूरी कार्यवाही के दौरान आपको न ही किसी से संपर्क करने का मौका दिया जाता है, न ही बाहर जाने दिया जाता है और इस प्रकार आपसे मोटी रकम जमा करा ली जाती है।

अनजान नंबर आने वाले कॉल, व्हाट्सएप कॉल/वीडियो कॉल, टेलीग्राम कॉल न उठाएं। भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई नियम नहीं है। अत: किसी के कहने पर या डर से खुद को कहीं बंद न करें।
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अपनी निजी जानकारी जैसे बैंक खाते संबंधी, आधार आदि को किसी के साथ साझा न करें। कोई भी संस्था आपसे आपका निजी पैसा किसी भी शासकीय खाते में जमा करने या सुरक्षित करने की सलाह नहीं देता। अत: कभी भी अपना पैसा किसी अनजान खाते में ट्रांसफर न करें। यदि आपके साथ कोई साइबर अपराध घटित होता है तो उसकी शिकायत तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें।
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