संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/सीवन/राजौंद। शारदीय नवरात्र पर्व के दूसरे दिन भी शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। दूसरे नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की। मां की भक्ति को लेकर मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। इस दौरान मां के श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाए।
शहर के बड़ी देवी माता मंदिर, छोटी देवी माता मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में पर्व को लेकर सुबह व शाम के समय काफी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं।
छोटी देवी मंदिर के पंडित विनायक भारद्वाज ने बताया कि मां दुर्गा एक शक्ति का रूप है। मां शक्ति की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा कि विद्यार्थियों और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही फलदायी होती है। जिनका चंद्रमा कमजोर हो उनके लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना अत्यंत अनुकूल होती है।
मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की माना जाता है देवी ः उधर, सीवन में महंत धीरज पुरी के आश्रम में एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर महंत धीरज पुरी ने कहा कि मान्यता है कि इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। उनके नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन मिलता है।
धीरज पुरी ने बताया कि ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करने वाली। अर्थात कठोर तप और ब्रह्म में लीन रहने के वजह से इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार आदि की वृद्धि होती है। कहा कि मां दुर्गा के इस स्वरूप को अनंत फल देने वाला माना गया है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान बढ़ता है और सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। माता ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखती हैं और आशीर्वाद देती हैं। माता के आशीर्वाद से हर कार्य पूरे हो जाते हैं और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। माता की आराधना करने से जीवन में संयम, बल, सात्विक, आत्मविश्वास की बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी, देवी पार्वती का वह रूप हैं जब उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। माँ ब्रह्मचारिणी का रूप अत्यंत सौम्य और शांत है। उनके दाएं हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है।
उनका ये रूप संयम, साधना और कठिन तपस्या का प्रतीक है। उनके इस स्वरूप से भक्तों को यह संदेश मिलता है कि जीवन में धैर्य और आत्मसंयम के साथ कठिनाइयों का सामना करना चाहिए। उन्होंने मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को दृढ़ संकल्प, आत्म-नियंत्रण और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य प्राप्त होता है।
उनकी कृपा से भक्त को जीवन में शांति, सफलता और हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से मनुष्य के अंदर तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है। इसके पश्चात आरती की गई व प्रसाद वितरित किया गया। इस आयोजन में सुभाष गर्ग, अशोक गोयल, मोहित बंसल, शालिनी, पूजा, वीना, रानी, ममता, मीनू, राजन मेहता, राजेश रहेजा, उषा, मोनिका व अन्य मौजूद रहे।
राजौंद में नवरात्र पर्व के तहत शुक्रवार को दूसरे नवरात्र के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की। नवरात्र का सामान खरीदने वाले श्रद्धालु प्रसाद, नारियल, आलू, कुट्टूू के आटे की खरीदारी कर रहे है। महंगाई के इस दौर में फल व व्रत से संंबधित सामग्री खरीदने वालों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। उधर दुर्गा मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, भद्रकाली मंदिर, बाबा बहादुर बण मंदिर में श्रद्धालुओं की चहल पहल ने नगर के वातावरण को भक्तिमय में माहौल में बदल दिया है।