पूंडरी। नवरात्र केवल नौ रातों का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, उमंग और सकारात्मकता का संचार करने वाली साधना है। यह मनुष्य को आत्मशुद्धि के साथ अपने भीतर के विकारों को दूर कर जीवन को सही दिशा देने का संदेश देता है। यह विचार पंडित रवि दत्त शास्त्री ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार मनुष्य के जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार पैदा करते हैं। उचित मार्गदर्शन के अभाव में व्यक्ति सही रास्ते से भटक जाता है। नवरात्र आत्मचिंतन और साधना के माध्यम से इन विकारों से मुक्ति पाने की प्रेरणा देते हैं।
शास्त्री ने बताया कि शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। यह पर्व श्रद्धालुओं को भक्ति और सकारात्मक जीवन अपनाने का संदेश देता है।
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11 अक्तूबर को होगी घटस्थापना
नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना की जाएगी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:20 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
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नवरात्र की तिथियां और देवी स्वरूप
11 अक्तूबर — प्रथम नवरात्र: मां शैलपुत्री की पूजा होगी।
12 अक्तूबर — द्वितीय नवरात्र: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होगी।
13 अक्तूबर — तृतीय नवरात्र: मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी।
14 अक्तूबर — चतुर्थ नवरात्र: मां कूष्मांडा का पूजन होगा।
15 अक्तूबर — पंचम नवरात्र: मां स्कंदमाता की आराधना होगी।
16 अक्तूबर — षष्ठम नवरात्र: मां कात्यायनी की पूजा होगी।
17 अक्तूबर — सप्तम नवरात्र: मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी।
18 अक्तूबर — अष्टम नवरात्र: मां महागौरी का पूजन होगा और दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी।
19 अक्तूबर — नवम नवरात्र: मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ महानवमी मनाई जाएगी।
20 अक्तूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।