कैथल। बेटा... मेरा बीपीएल राशन कार्ड काट दिया। अब राशन नहीं मिल रहा। चेक कराया तो बताया गया कि इनकम ज्यादा हो गई है। मैं विधवा औरत हूं, मेरी इनकम कैसे बढ़ गई?
यह सवाल जब एक बुजुर्ग महिला ने समाधान शिविर में कर्मचारी से किया तो कुर्सी पर बैठे कर्मचारी ने परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) देखते हुए जवाब दिया—माता... इसका कोई समाधान नहीं है। पूरे परिवार का एक ही पीपीपी बनवाना पड़ेगा। अलग-अलग फैमिली आईडी नहीं बनेगी। यह जवाब सुनकर बुजुर्ग महिला मायूस होकर भारी मन से शिविर से बाहर निकल गई।
ऐसी ही पीड़ा एक व्यक्ति की थी, जो पिछले डेढ़ साल से अपनी 65 वर्षीय पत्नी की पेंशन बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। किसी की चार माह से पेंशन रुकी है, तो किसी को बार-बार ‘चेक कराओ’ कहकर टाल दिया जा रहा है।
लघु सचिवालय में वीरवार को आयोजित समाधान शिविर में व्यवस्था की लचर तस्वीर साफ दिखाई दी। बड़े अधिकारी मौजूद थे, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी शिविर में थे, लेकिन जो सबसे जरूरी था—जनता की समस्याओं का समाधान, वह कहीं नजर नहीं आया। सवाल यह है कि जब यहां भी समाधान नहीं मिल रहा, तो लोगों को दूर-दूर से बुलाने का औचित्य क्या है?
डीसी ने अफसरों से किया जवाब-तलब ः सुबह से ही लोग शिकायतें लेकर पहुंचने लगे थे। अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद थे। करीब 11 बजे डीसी पहुंचीं, जिसके बाद अधिकारी-कर्मचारी अलर्ट मोड में दिखाई दिए। डीसी ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं। जो लोग पहले शिकायत बताकर लौट चुके थे, वे डीसी को देखकर दोबारा शिविर में पहुंचे और अपनी बात रखी। डीसी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए और अफसरों से जवाब-तलब किया कि किस तरह की शिकायतें आ रही हैं और अब तक उनका क्या निवारण किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेने और जल्द समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन के अनुसार शिविर में कुल 8 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन पर संबंधित विभागों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
मैं विधवा हूं और पेंशन व राशन के सहारे ही जीवन चलता है। मेरा बीपीएल राशन कार्ड काट दिया गया। कहा गया कि इनकम ज्यादा है। विधवा औरत की इनकम कहां से होगी? शिविर में अफसर बोले- इसका कोई समाधान नहीं। -सावित्री, किछाना
चार महीने से मेरी पेंशन रुकी है। कई बार चक्कर काट चुका हूं पर नतीजा सिफर है। आज मैडम ने कहा है कि पेंशन आ जाएगी, लेकिन कब, कोई नहीं बता रहा। समाधान की उम्मीद में आया था, लेकिन यहां भी कुछ खास नहीं हुआ। -वीरभान, सीवन गेट
चार महीने से पेंशन नहीं आ रही। दो-तीन बार चेक भी करवा लिया, लेकिन हर बार वही जवाब आश्वासन का मिलता है- देखेंगे। पेंशन के भरोसे ही अपना जीवन यापन करता हूं। आज भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। -भाग सिंह, मुदंडी
मैं डेढ़ साल से पत्नी की पेंशन बनवाने के लिए भटक रहा हूं। दस्तावेज पूरे हैं, पर पेंशन नहीं बनी। हर जगह सिर्फ आश्वासन मिलता है। शिविर में भी कह दिया कि बन जाएगी, लेकिन कब—इसका कोई जवाब नहीं।
-सोहन लाल, प्रताप गेट