संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस तथा चार अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस मामले को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए जनप्रतिनिधि की बात न सुनने वाले एसडीएम का तत्काल तबादला करने की भी मांग की है।
सांसद ने कहा कि जनहित में उठाई गई विपक्ष की आवाज को सत्ता के दबाव से नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि गुहला के विधायक देवेंद्र हंस बीडीपीओ चीका परिसर में दुकानों के निर्माण से जुड़े मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। सांसद ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराते हुए दर्ज मुकदमे को तत्काल वापस लेने और संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण की मांग की है।
उन्होंने कहा कि एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने न तो विधायक की बात को गंभीरता से सुना और न ही समाधान निकालने का प्रयास किया। इसके विपरीत, विधायक और उनके साथ गए लोगों के खिलाफ मानहानि, धमकी देने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे “मनगढ़ंत” आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया, जिसमें एक पत्रकार का नाम भी शामिल है। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार में अफसरशाही इतनी हावी हो चुकी है कि विधायकों के फोन तक नहीं उठाए जाते। यही कारण है कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं मौके पर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने वाले चुने हुए प्रतिनिधि के साथ अपराधी जैसा व्यवहार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। भारतीय लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका शासन की दो प्रमुख संस्थाएं हैं, जो मिलकर व्यवस्था संचालित करती हैं। यदि प्रशासनिक अधिकारी जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय किसी राजनीतिक दल के एजेंट की तरह कार्य करने लगें, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस ने प्रदर्शन के दौरान एसडीएम को प्रतीकात्मक रूप से झुनझुना थमाया था। इसका वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।