कैथल/गुहला-चीका। किसान फिलहाल आगामी आदेशों तक दिल्ली कूच तो नहीं करेंगे मगर बॉर्डर पर डटे रहेंगे। किसान संगठनों की ओर से आगामी रणनीति बनाने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
उधर पंजाब से सटे बॉर्डर पर भी अर्ध सैनिक बल के जवान तैनात है और इस दौरान सुरक्षा भी कड़ी रहेगी। स्थानीय किसानों का कहना है कि तीन मार्च को इस आंदोलन के दौरान मारे गए शुभकरण का भोग है तब तक कोई गतिविधि नहीं होगी।
दूसरी ओर किसान आंदोलन के 19वें दिन भी टटियाना बॉर्डर पर पूर्ण शांति बनी रही। मुख्य नाके पर पुलिस व आईटीबीपी के जवान गैस के गोलों व वज्र वाहन के साथ तैनात रहे। टटियाना बॉर्डर सील होने के कारण दिन भर लोगों को आवाजाही करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर गुप्तचर विभाग की टीमें भी बॉर्डर पर लगातार किसानों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। किसान लगातार दिल्ली जाने की समय सीमा बढ़ा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों व व्यापारी परेशान हैं। गुहला क्षेत्र में बैरिकेडिंग के चलते सैकड़ों दुकान व शोरूम संचालक मंदी की मार झेल रहे हैं। लोगों के लिए पंजाब में पटियाला व समाना जाना मुसीबत बन चुका है।
टटियाना बॉर्डर सील होने से पूरे चीका शहर में उद्योग और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इनमें काम करने वाले श्रमिक अस्थायी रूप से बेरोजगार होने की कगार पर हैं। यही नहीं, शहर के दूध व सब्जी उत्पादकों को अपना उत्पाद बेचने में समस्या आती है।
उधर सुबह से हो रही बारिश में भी जवान मुस्तैद दिखे। कई जगह शहर में जलभराव देखने को मिला। बॉर्डर पर पैदल चलने वाले राहगीरों को भी भीगते हुए बॉर्डर पर पंजाब के क्षेत्र में जाना पड़ा।