संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। सरकार एक तरफ जहां प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए व खिलाड़ियों को हर सुविधा मुहैया करवाने के दावे करती है। वहीं, राजौंद क्षेत्र के अधिकांश गांवों में खेल के मैदान तक नहीं है। इस कारण खिलाड़ियों को खाली खेतों व गलियों में खेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
क्षेत्र में अधिकतर गांवों में खेल मैदान के अभाव के चलते खिलाड़ियों को कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। बताया कि गांव में खेलने के लिए खेल मैदान न होने के कारण गांव के युवाओं को खेलों से वंचित रहना पड़ रहा है।
खिलाड़ियों ने बताया कि वह खेल मैदान के अभाव में वह न तो खेल प्रतियोगिता का आयोजन करवा सकते हैं तथा न ही वह अभ्यास कर सकते हैं। इन खिलाड़ियों ने बताया कि खेतों में बनाए गए अस्थायी मैदानों में भी उन्हें कुछ दिन खेलना ही नसीब हो पाता है। क्योंकि खाली खेतों में कुछ दिन बाद बिजाई कर दी जाती है, जिससे उनसे वह मैदान भी छिन जाते हैं। इसके बाद खिलाड़ियों को गांव की सड़कों व गलियों में खेलना पड़ता है।
इन खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि खेल के मैदान के अभाव में गांव की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता, जिससे कई प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं।
क्रिकेट प्रेमी राहुल छाबड़ा, पवन मितल, मनोज शर्मा, जोगिंद्र सिंह, सोनू शर्मा, मोहन शर्मा, दीपक इत्यादि ने बताया कि अगर कस्बा में एक अच्छा खेल स्टेडियम बनाकर उसमें एक कोच की नियुक्ति की जाए तो कस्बा से कई होनहार खिलाड़ी प्रदेश व देश व विदेश तक अपनी बहादुरी के परचम लहरा सकते हैं।
इन खिलाड़ियों ने मांग की है कि कस्बा में एक खेल स्टेडियम अवश्य बनाया जाए ताकि गांव के होनहार खिलाड़ी अपने अंदर छुपी प्रतिभा को निखार सके।