कैथल। जिला प्रशासन ने पराली जलाने के मामलों पर कार्रवाई करते हुए 335 किसानों से आठ लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना वसूला है। डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण करना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, वहीं स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की सूचना न देने की अनियमितता पाए जाने पर 38 नंबरदारों को निलंबित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों को जमीन में ही सड़कर खाद बनाने के लिए 35 हजार एकड़ में डी कंपोजर वितरित किया जा चुका है। इस डी कंपोजर के माध्यम से पराली जमीन में ही सड़कर खाद के रूप में परिवर्तित हो जाती है। उन्होंने बताया कि जागरुकता का परिणाम है कि जिले में अब तक पिछले साल की अपेक्षा 50 प्रतिशत पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। चार लाख एकड़ धान के एरिया मेंसे मात्र 350 एकड़ में पराली जलाने की घटनाएं मिली हैं।
उधर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि पराली जलाने के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।अब तक जिले में कुल 517 पराली जलाने के मामले सेटेलाइट के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर माह से किसानों को पराली नहीं जलाने के बारे विभिन्नमाध्यमों से जागरूक किया जा रहा है।