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Kaithal News: पूंडरी में ज्यादा निर्दलीय, किसके सिर बंधेगा ताज

Sun, 15 Sep 2024 03:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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नरेंद्र राणा
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पूंडरी। पूंडरी हलके में लगभग सभी उम्मीदवारों की ओर से नामांकन दाखिल करने से पूंडरी हलके की हवा बदली बदली सी नजर आने लगी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम दिन पिछड़ा वर्ग, रोड समाज, जाट समाज, सिख समाज, अनुसूचित जाति व गुर्जर समाज के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर माहौल को और गर्म कर दिया।

गौरतलब है कि पूंडरी विधानसभा क्षेत्र रोड बाहुल्य है। इसके बाद जाट व ब्राह्मण मतदाता हैं। यदि पिछड़े वर्ग व अनुसूचित जाति की बात करें तो फिर कोई उनके आगे ठहर नहीं पाएगा। 2019 से पहले के चुनावों में रोड व ब्राह्मण उम्मीदवार के बीच ही मुकाबला होता रहा। इस बार चुनाव में नए समीकरण बन सकते हैं क्योंकि इस सीट पर सबसे अधिक निर्दलीय मैदान में हैं।
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वहीं, क्षेत्र में लगभग तीन बार ब्राह्मण, एक बार राजपूत, लगभग सात बार रोड, जिसमें चार बार चौ. ईश्वर सिंह रोड समाज से अकेले विधायक रहे। अगर वर्ष 2019 के चुनाव की बात करें तो मुक़ाबला रोड व पिछले वर्ग के सतबीर भाणा जो जाट बेल्ट से संबंध रखते हैं।

उन्होंने भाजपा की लहर के बावजूद कांग्रेस के वोट बैंक में अच्छी ख़ासी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। जैसे पूंडरी हलके का 1996 से इतिहास रहा है। उसी राह पर चलते हुए पूंडरी हलके की जनता निर्दलीय रणधीर गोलन को चुना।

गौरतलब है कि जबसे पूंडरी हलके के साथ पाई बेल्ट जुड़ी है। तब से पाई बेल्ट का किसी भी उम्मीदवार की हार जीत में अहम भूमिका रही है। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रबल दावेदार सतबीर भाणा, रणधीर गोलन व सज्जन ढुल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर पूंडरी हलके की राजनीति को नए मोड़ पर ला दिया है।

वहीं, भाजपा के पूर्व विधायक दिनेश कौशिक ने भी निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी की छवि अच्छी है और भाजपा के प्रत्याशी भी समाजसेवा के माध्यम से हलके लोगों के बीच लोकप्रिय हुए हैं और राजनीति में नए खिलाड़ी है।
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पूंडरी हलके में टक्कर कांग्रेस बनाम कांग्रेस के बाग़ी व भाजपा और भाजपा के बाग़ी का भी हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 16 सितंबर के बाद ही स्थिति कुछ साफ़ हो पाएगी। यदि लोकसभा की बात करें तो पूंडरी में कांग्रेस की स्थिति बेहतर हुई लेकिन उस समय सभी कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ज़ोर लगाया था। अब राह अलग-अलग होने से पूरा ज़ोर लगाना होगा। यही बात भाजपा पर भी लागू होती है लेकिन अलग बात यह रही कि रोड समाज से पांच उम्मीदवार होने से हलके में कई तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं। संवाद
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