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नैतिक गुणों से बनते हैं वंदनीय : भगवान

Tue, 02 Apr 2024 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शिक्षा का मूल उद्देश्य हैं चरित्र का निर्माण करना, असत्य से सत्य की ओर ले जाना, बंधन से मुक्ति की ओर जाना, लेकिन आज की शिक्षा भौतिकता की ओर ले जा रही है।

भौतिक शिक्षा से भौतिकता की प्राप्ति होती है और नैतिक शिक्षा से चरित्र बनता है। नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है, क्योंकि नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है। सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है। इसलिए वर्तमान के समय प्रमाण भौतिक शिक्षा के साथ साथ बच्चों को नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। उक्त उदगार माउंट आबू राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहे। वे जवाहर नवोदय विद्यालय तितरम में छात्र, छात्राएं और शिक्षकों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर बोल रहे थे।
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भगवान भाई ने कहा कि विद्यार्थियों को मूल्यांकन, आचरण, अनुकरण, लेखन, व्यावहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। वर्तमान के समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। परीक्षा के समय अपनी सकारात्मक सोच रखे। परीक्षा का डर मन से निकालिए। समय का सदुपयोग करे अपना हैंड राइटिंग अच्छा और स्पष्ट लिखे। किसी का कॉपीराइट न करे, आत्मविश्वास से लिखे। उन्होंने बताया कि परोपकार, सेवाभाव, त्याग, उदारता, पवित्रता, सहनशीलता, नम्रता, धैर्यता, सत्यता, ईमानदारी सद्गुण नहीं आते, तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं।
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शिक्षा एक बीज है और जीवन एक वृक्ष है। जब तक हमारे जीवन रूपी वृक्ष में गुण रूपी फल नहीं, आते तब तक हमारी शिक्षा अधूरी है। समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम, सद्भावना, भातृत्व, नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से संचालित होता हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम में उप प्राचार्य डीसी गुप्ता, प्रदीप यादव, विकास यादव, नितिन कंकेडीया, योगेन्द्र सिंह, जितेन्द्र यादव, बीके महिंद्र भाई मौजूद रहे।
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