पाई। केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में मामूली वृद्धि किए जाने पर किसानों ने नाराजगी जताई है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेताओं ने इसे किसानों के साथ भद्दा मजाक करार देते हुए सरकार से घोषित समर्थन मूल्य पर पुनर्विचार की मांग की है। भाकियू के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी और कार्यकारी अध्यक्ष बलवान पाई ने कहा कि सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केवल 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में मात्र तीन प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर महंगाई दर में लगभग 8.5 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि कृषि कार्यों में प्रयोग होने वाली बीज, खाद, डीजल, तेल, कीटनाशक दवाइयों और सिंचाई जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़े हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने धान की लागत 1627 रुपये प्रति क्विंटल आंकी है, जो वास्तविकता से काफी कम है। उनका कहना है कि किसान एक फसल तैयार करने में करीब छह माह तक मेहनत करता है लेकिन उसकी मेहनत का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया। फसल की बुवाई से लेकर कटाई और मंडी तक पहुंचाने की प्रक्रिया को शामिल करने पर लागत 2500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बैठती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से घोषित मूल्य न तो लागत से 50 प्रतिशत अधिक है और न ही इसमें किसानों की मेहनत का पूरा सम्मान किया गया है। नेताओं ने कहा कि यदि किसी कारण उत्पादन कम होता है तो किसान को नुकसान अपनी जेब से उठाना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दोबारा विचार करने और किसानों के हित में संशोधित निर्णय लेने की मांग की।