चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय मार्ग पर हरियाणा महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा का घेराव कर किसानों जमकर नारेबाजी की। किसी तरह स्थिति को संभालकर पुलिस कर्मियों ने मंत्री के काफिले को निकाला।
दोपहर करीब एक बजे महिला मंत्री लोक निर्माण विश्राम गृह से हलके के गांव लांबा खेड़ी में एक शिक्षक के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए निकली थीं। इस दौरान मुख्य मार्ग पर उनका सामना ट्रैक्टर-ट्रालियों से दिल्ली पड़ाव में शामिल होने जा रहे किसानों से हो गया। मंत्री के काफिले को देखकर किसानों ने मंत्री व सरकार के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। इतना ही काफिले को रोकने के लिए किसान सड़ पर लेट गए। अचानक तनाव पूर्ण स्थिति को देखकर सुरक्षा कर्मी हरकत में आ गए। तत्काल महिला मंत्री के सुरक्षा घेरे को मजबूत कर लिया गया। कलायत थाना प्रभारी जयवीर सिंह ने मंत्री के सुरक्षा कर्मियों के साथ वाहनों के काफिले को सुरक्षित गंतव्य स्थान की तरफ निकाल दिया गया गया।
ऐसा पहली बार था जब मंत्री का गृह निर्वाचन क्षेत्र में इस प्रकार विरोध किसानों द्वारा किया गया। किसानों का कहना था कि महिला मंत्री कृषि कानूनों की वकालत करती हैं। यदि किसान की बेटी हैं तो उन्हें किसानों की बात सुनने के लिए रुकना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बीजेपी की विधायक उन्होंने इसलिए नही चुना था कि किसानों को तबाह करने के लिए वे कुर्सी का मोह ही न छोड़ें। आज किसानों से मुंह छिपा कर महिला मंत्री पुलिस प्रोटेक्शन का सहारा लेकर निकल गई। पर मंत्री यह बात भूल गई कि जब वोट मांग रही थी तो सुरक्षा कवच हम लोग ही बने थे।
वहीं हरियाणा महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि जो दायित्व हलका वासियों ने उन्हें सौंप रखा है उसका संजीदगी से वे निर्वहन कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस पक्ष में हैं कि सौहार्द पूर्ण माहौल में किसानों के मुद्दों का हल हो। वार्ता के लिए सरकार ने किसानों को आमंत्रित भी किया है।