संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। क्योड़क में हांसी-बुटाना नहर की पटरी से मिट्टी उठाकर खुले में बेचने के आरोप में बड़ी कार्रवाई हुई है। माइनिंग ऑफिसर ने ठेकेदार के डंपर और पोकलेन को सीज करने के साथ केस दर्ज कराया है।
मंगलवार को सरपंच जसबीर सिंह और ग्रामीण उपायुक्त से उनके कार्यालय में मिले थे। उपायुक्त ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। बुधवार को प्रशासन की ओर से ठेकेदार पर बड़ी कार्रवाई की गई। सरपंच जसबीर सिंह का कहना है कि इस संदर्भ में ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पारित किया गया है, जिस पर सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। ग्रामीण पटरी की मिट्टी उठाने के मामले से नाराज हैं।
क्योड़क गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मिट्टी घोटाले के आरोप में ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वे ग्राम पंचायत का प्रस्ताव लेकर सीधा अनिल विज से मुलाकात करेंगे। उन्होंने मिट्टी को दोबारा डालवाने और ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की है।
सरपंच ने बताया कि क्योड़क गांव की सीमा से लगभग दो किलोमीटर तक, तीन फुट गहरी और 30 फीट चौड़ी पटरी से मिट्टी उठाई गई है। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता, कार्यकारी अभियंता और उपमंडल पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब घग्गर नदी में अधिक पानी आने से बाढ़ जैसी स्थिति बनी थी, तब उन्होंने पटरी में मिट्टी डाली थी। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार ने पटरी से हजारों डंपर मिट्टी चोरी करके बेची। किसानों का कहना है कि नहरी विभाग के एक्सईएन और उनकी टीम को मामले की जांच करनी चाहिए थी।
निविदा की शर्तों के अनुसार ठेकेदार को मिट्टी एक जगह पर जमा करनी थी, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने मिट्टी बेचकर भारी मुनाफा कमाया। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में घग्गर नदी में भारी मात्रा में रेत और मिट्टी बहकर आती है। पिछले वर्ष आई बाढ़ में जब रिंग बांध टूट गए थे, प्रशासन को मिट्टी दूर-दराज के क्षेत्रों से मंगवानी पड़ी थी। इसके कारण रिंग बांध में आए कटाव को समय पर ठीक नहीं किया जा सका और क्षेत्र में जानमाल का भारी नुकसान हुआ।