राइस मिलर्स एसोसिएशन ने कहा कि 1509 धान को लेकर यदि सरकार द्वारा फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद भी परेशान किया गया तो सरकार को दिए जाने वाले चावल के लिए मिलर्स जिम्मेवार नहीं होंगे। वे होल्डिंग चार्जिज अथवा अन्य कोई चार्ज देरी के लिए नहीं देंगे।
क्योंकि मिलर्स ने सरकार के निर्देशानुसार 1509 ग्रेड ए को पीआर ग्रेड ए को साथ रखा हुआ है। यह फैसला मिलर्स एसोसिएशन की बैठक में लिया गया। जींद रोड स्थित अग्रवाल धर्मशाला में मिलर्स एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान मांगें राम खुरानिया ने की।
जांच के कारण बंद मिलें, चावल देने में होगी देरी
मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार द्वारा फिजिकल वेरिफिकेशन से उन्हें कोई परेशानी नहीं हैं। हर साल एजेंसियां यह कार्रवाई करती हैं। लेकिन एक साथ टीमों का गठन करके की जा रही जांच से कई दिनों से मिलों में मिलिंग कार्य बंद है। जिन मिलों में यह जांच पूरी हो चुकी है, वहां काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन जहां यह अभी नहीं हुई, वहां मिलिंग कार्य बंद होने के कारण सरकार को चावल देने मेें देरी हो सकती है। इसके लिए सरकार जिम्मेवार होगी।
इन सब के बावजूद मिलर्स को इस फिजिकल वेरिफिकेशन से कोई परेशानी नहीं हैं। लेकिन यदि इस जांच के बाद मिलर्स को 1509 की जांच के लिए तंग किया गया तो इससे सरकार को नुकसान होगा। मिलर्स ने कहा कि सरकार के आदेशानुसार मिलर्स ने इस धान को ग्रेड ए धान के साथ रखा है। एसोसिएशन के प्रधान मांगें राम खुरानिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदीश अग्रवाल ने कहा कि कैथल में अब तक की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। जहां 1509 की मात्रा कम है, वहां पीआर ग्रुप ज्यादा है। दोनों को मिलाकर स्टॉक पूरा है।
परेशान किया तो अगले साल से नहीं करेंगे मिलिंग कार्य
बैठक में कई सदस्यों ने यहां तक ऐलान कर दिया कि यदि सरकार द्वारा मिलर्स को बेवजह परेशान किया जाता रहा तो अगले साल से मिलिंग कार्य से तौबा कर लेेंगे। क्योंकि सरकार मिलर्स की समस्याओं की ओर ध्यान देने की बजाए इस उद्योग से बाहर के लोगों के आरोपों पर उन्हें परेशान कर रही है।
1509 को लेकर सता रहा है मिलर्स को डर
उधर, सरकार द्वारा मिलों में करवाई गई फिजिकल वेरिफिकेशन में कई मिलों में 1509 का स्टॉक खरीदी गई मात्रा से कम पाया गया है। ऐसे में मिलर्स में इस बात को लेकर डर बना हुआ है कि सरकार आखिर क्या फैसला लेती है। सरकार द्वारा पूर्व में जारी किया गया 1509 एवं ग्रेड ए के धान को एक ही स्टॉक में रखने संबंधी पत्र मिलर्स के लिए ढाल का काम कर सकता है।
लेकिन इसके बावजूद मिलर्स को सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम को लेकर चिंता सता रही है। यदि सरकार ने 1509 के स्टॉक को पूरा करने के लिए कोई आदेश जारी कर दिया तो उन मिलर्स के लिए परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। जिन मिलों में इस धान का स्टॉक कम पाया जा रहा है।
बैठक में अश्विनी शोरेवाला, महाबीर सिंगला, जगदीश अग्रवाल, रामनिवास मित्तल, नरेश शोरेवाला, रामनिवास खुरानिया, सतीश चावला, बंटी मिगलानी, रविंद्र मित्तल, राकेश कुमार, राकेश कुमार, अंबा राइस, केशवपाल गर्ग, विष्णु मित्तल, प्रो. राजकुमार, सचिन मित्तल, तरसेम गर्ग सहित अन्य मिलर्स ने भाग लिया।
जिले में 74 मिलों में चल रही है जांच
जिले में 112 राइस मिलों में से 74 मिलों में इस समय फिजिकल वेरिफिकेशन चल रही है। इनमें 15 टीमों द्वारा जांच की जा रही है। करीब 50 से अधिक राइस मिलों में यह जांच पूरी हो चुकी है। जिसमें 1509 एवं पीआर ग्रुप के धान के स्टॉक की जानकारी जुटाई जा रही है।
जिले में अभी मिलों की जांच चल रही है। जैसे ही यह पूरी होगी, रिपोर्ट बता दी जाएगी। फिलहाल सरकार के निर्देशानुसार फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जा रही है।
केएम पांडुरंग, डीसी, कैथल।