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जिप की जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद बिजली निगम ने दे दिया मीटर

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जिला परिषद के दूसरे दिन के सत्र में भी पार्षदों ने बड़ी रुचि नहीं दिखाई। कुल 21 में से चेयरपर्सन सहित केवल आठ पार्षदों ने सत्र में भाग लिया। 11 बजकर 47 मिनट पर डीडीपीओ के संबोधन से शुरू हुआ जिप का द्वितीय दिन का सत्र 12 बजकर 25 मिनट पर समाप्त हो गया। जिसमें जिला पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद निगम द्वारा मीटर लगाने और स्वच्छता पुरस्कार के 20 लाख खर्च करने का मुद्दा जोर शोर से उठा। जिप की सीईओ कमलप्रीत कौर व चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर की अगुवाई में पार्षदों ने विभिन्न विभागों की लापरवाही के मुद्दे जोरशोर से उठाए। सत्र के दूसरे दिन एचसीएस सुभाष कुमार, डीडीपीओ जसविंद्र सिंह, रतिराम, मुसिया राम, कमलेश देवी, सुमन रानी व सुदेश चंदाना सहित कई विभागों के अधिकारी भी मौके पर थे।
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स्वच्छता पुरस्कार के 20 लाख रुपये कहां गए? सदन को पता नहीं
सत्र के दौरान सबसे पहले जिला परिषद की स्वच्छता पुरस्कार की 20 लाख रुपये की राशि का मुद्दा उठा। रवि तारांवाली व अन्य पार्षदों ने कहा कि जिप के पास स्वच्छता पुरस्कार के रूप में 20 लाख रुपये राशि आई थी। यहां के अधिकारियों द्वारा उसे राशि को बिना सदन की सहमति के खर्च कर दिया गया। उन्हें तो ये तक पता नहीं कि वे पैसे कहां और किसकी अनुमति से खर्च हुए।। जिप की पिछली बैठक में इसकी जांच के लिए कमेटी गठित करने पर भी पार्षदों ने सहमति जताई थी। आज तक न तो कमेटी बनी है और न ही जांच हुई। सीईओ ने अकाउंटेंट को कहा कि जांच बारे जल्द कार्रवाई पूरी की जाए।
जिप की जमीन पर कब्जे के बावजूद बिजली निगम ने लगा दिया मीटर
जिला परिषद भवन के पास जिप की जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद निगम ने बिजली का मीटर लगा दिया। पार्षदों ने कहा कि जिप के कार्यालय की जमीन पर ही कब्जा हो गया है और अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। बिजली निगम द्वारा कब्जे की जमीन पर भी बिजली का मीटर दे दिया गया, जो अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
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पार्षदों ने यह उलाहना तक दे डाला कि महिलाओं के उत्थान के लिए एक विभाग द्वारा जिप से जगह मांगी गई थी, वह तो दे नहीं सके। लेकिन अवैध कब्जे करके जमीन दबाने वालों पर कार्रवाई नहीं है। सीईओ ने कहा कि कब्जे वाले स्थान की निशानदेही करवाई गई है, जल्द ही इसकी रिपोर्ट आएगी।
20 लाख रुपये के फर्नीचर से कार्यालय में एक कुर्सी तक नहीं पहुंची
जिप कार्यालय में फर्नीचर के लिए 20 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन कार्यालय में एक कुर्सी तक नहीं पहुंची। पार्षदों ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि आखिर 20 लाख रुपये से खरीदा गया फर्नीचर कहां रखा गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी ले गए। जिप में आज भी पुराने सोफे और एलईडी लगे हैं। पार्षदों ने यह भी कहा कि हाउस की बैठक में जो प्रस्ताव सहमति से पास होते हैं, उन पर तो कोई काम हो नहीं रहा। जिन कार्यों के बारे में सदन को पता तक नहीं, वहां लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा :
इसके अलावा सत्र के दौरान लीकर के तीन करोड़ रुपये खर्च करने पर भी विचार हुआ। पार्षदों ने कहा कि अन्य जिलों में यह राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इस पर सीईओ ने कहा कि इसके लिए मुख्यालय से बातचीत की जाएगी। वहीं गांवों में बने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सफाई कर्मियों के तबादले का नियम बनाने पर भी चर्चा हुई। जिप वाइस चेयरमैन मुनीष कठवाड़ ने कहा कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 70 सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम बनाए गए हैं, लेकिन कहीं भी उनका प्रयोग नहीं हो रहा। वहीं गांवों में जो सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं, वे भी सफाई का कार्य सही ढंग से नहीं कर रहे। कर्मचारियों के तबादले की नीति बनाने के लिए संबंधित विभाग को अवगत करवाने पर भी विचार हुआ। वहीं स्कूलों में पेंट करवाने को लेकर भी चर्चा की गई।
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