कैथल। धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस बार शनिवार को यह तिथि शुरू होने से इस दिन मनाया जाएगा। हालांकि तिथि को लेकर मतभेद के चलते रविवार को भी धनतेरस मनाने की तैयारी है। धनतेरस का शनिवार शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 12 बजकर 08 मिनट तक शुभ मुहूर्त है।
हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा शास्त्री ने बताया कि अबकी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 22 अक्तूबर दिन शनिवार को शाम 06:02 बजे से होगी और यह तिथि अगले दिन 23 अक्तूबर की शाम 06:03 बजे तक मान्य है। धनतेरस की तिथि का प्रारंभ 22 अक्तूबर को हो रहा है और समापन 23 को होगा। ऐसे में लोगों में तारीख को लेकर असमंजस है कि धनतेरस किस दिन मनाया जाए। उन्होंने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार 22 अक्तूबर को ही धनतेरस मनाया जाएगा।
इस दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरी की जयंती मनाई जाती है और लोग शुभ मुहूर्त में सोना, चांदी या अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं, जो उनके लिए उन्नतिदायक सिद्ध होता है। दीपावली को लेकर बाजार सज-धजकर तैयार है। दो साल बाद ग्राहकों की मार्केट में भीड़ दिख रही है।
इस पर्व को लेकर बर्तन व सर्राफा दुकानों को विशेष रूप से सजाया गया है। आज अच्छी बिक्री के लिए कई सर्राफा, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर के व्यवसायियों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानों को तो आकर्षक तरीके से सजाया ही है। आकर्षक स्कीमें भी दी जा रही है। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए ज्वेलरी की दुकानों पर हॉलमार्क ज्वैलरी आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध है। जहां ग्राहकों को हर खरीद पर स्कीम दी जा रही है। इसके अलावा बर्तन बाजार में पीतल, तांबे, स्टील के बर्तनों की धूम है।
बर्तन खरीदना माना जाता है शुभ
धनतेरस को धन त्रयोदशी व धनवंतरि जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान धनवंतरि का भी अवतरण हुआ था, जो भगवान विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं। इस दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा है। खासतौर पर इस दिन पीतल या चांदी के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
मां लक्ष्मी की होती है विशेष कृपा
मां लक्ष्मी की कृपा से ही ऐश्वर्य और वैभव की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन पीतल या चांदी के बर्तन खरीदने से घर में धन-समृद्धि आती है। दीपावली से पहले शरद पूर्णिमा के त्योहार का मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव की तरह मनाया जा चुका है।