कैथल। आधी मई बीतने को है और अब गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। कुछ समय पहले तक मौसम में जो बदलाव आया था, उससे लोगों को गर्मी से राहत मिली थी।
हालांकि इस हफ्ते गर्मी का तीखापन दिखने लगा है। शनिवार को अधिकतम तापमान एकाएक 10 डिग्री बढ़कर 41.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 30.1 और न्यूनतम 21.1 डिग्री सेल्सियस रहा था।
तेज धूप लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। गर्म हवा के बीच लोगों का दोपहर को घर से निकलना मुश्किल हो गया। शनिवार को जरूरी काम से निकले लोग भी मुंह पर कपड़ा बांधे हुए नजर आए। दोपहर में स्कूल से छुट्टी होने पर घर आने के दौरान बच्चे गर्मी से परेशान है।
दोपहर के समय बाजार भी सुनसान रहने लगे है। इस कारण कॉलेज के विद्यार्थी भी मुंह व सिर पर कपड़ा ढक कर गुजरते हैं। दूसरी ओर कृषि वैज्ञानियों का कहना है गर्मी बढ़ने के बाद किसानों की जमीन को काफी फायदा मिलेगा। दरअसल, गर्मी बढ़ने से जमीन के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने किसानों सेे खेत और जमीन को समतल करने का आह्वान किया है।
प्रशासन नेे जारी की हिदायतें
डीसी जगदीश शर्मा ने कहा कि गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें यानी बचाव इलाज से बेहतर है। डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें। ताजे फल, सलाद व घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 से शाम चार बजे के बीच धूप में सीधे न जाए। बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें। तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। डीसी ने बताया कि जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें, उन्हें घर के भीतर रखें।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि अब लगातार तापमान बढ़ेगा। इससे गर्मी से कुछ परेशानी तो होगी, लेकिन गर्मी बढ़ेगी तो मानसून भी जल्द आएगा। इस बार सामान्य तौर पर गर्मी होगी। सभी किसानों से आग्रह है कि अपने खेत जोत ले, ताकि जमीन में होने वाले कीटाणु खत्म हो जाएं। सब्जियों की खेती करने वाले किसान समय-समय पर सब्जियों की सिंचाई करें।