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खाद के रैक नहीं आने से प्राइवेट डीलरों से खाद खरीदकर काम चला रहे किसान

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धान की फसल के लिए जिले के पैक्सों और को-ऑप्रेटिव सोसाइटी के पास खाद की अनुपलब्धता किसानों के लिए परेशानियां बढ़ा रही है। यूरिया खाद व डीएपी नहीं मिलने से किसान जैसे-तैसे करके किसान प्राइवेट डीलरों से खाद खरीदकर खेतों में डाल रहे हैं । जिले में खाद की कमी का एक बड़ा कारण ये भी है कि जो एजेंसियां खाद की सप्लाई पैक्सों को करती हैं, उनके पास खाद के रैक नहीं आ रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार हैफेड के पास खाद का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन किसान उसे पुराना बताकर खरीद नहीं रहे हैं। ऐसे में ज्यादा जरूरत होने पर प्राइवेट कंपनियों से यूरिया खाद खरीदा जा रहा है।
37 पेक्सों से किसानों को उपलब्ध होता है खाद-जिले के किसानों को 37 पेक्सों से खाद उपलब्ध होता है और यहीं से डीएपी मिलता है। कृभको और एफ्को एजेंसी पैक्सों में खाद की सप्लाई करती हैं। इफको के क्षेत्रीय अधिकारी सुरजीत सिंह राठी ने बताया कि 17 जुलाई को उनके पास खाद का एक रैक आया था, जिसमें 59 हजार बैग खाद लाया गया। वो पेक्सों को उपलब्ध करवाया जा चुका है। जैसे ही रैक आता है उसी समय किसानों के लिए भेज दिया जाता है।
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धान के सीजन में करीब 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद और 12 हजार एमटी डीएपी की होती है खपत-जिले में इस बार एक लाख 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाए जाने का अनुमान है। इसको देखते हुए कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद और 12 हजार एमटी डीएपी की लागत संभावित है। पैक्सों में सरकारी एजेंसियों से खाद की पूरी आपूर्ति नहीं होने के कारण किसान प्राइवेट डीलरों से भी खाद खरीद रहे हैं।
को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंध रणबीर सिंह बैनीवाल ने बताया कि खाद को लेकर वे लगातार एजेंसियों से संपर्क बनाए हुए हैं। जैसे ही सप्लाई आती है, वह तुरंत पेक्सों में भेजी जा रही है। हालांकि रैक न आने के कारण दिक्कत जरूर है, लेकिन किसान प्राइवेट भी खरीद कर रहे हैं। फिलहाल जिले में खाद को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं है।
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