संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं सीजन अपने चरम पर है, लेकिन खरीद और उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि मंडियों में तिल रखने की जगह नहीं बची और किसान मजबूरन सड़कों पर गेहूं उतार रहे हैं।
जिले की विभिन्न मंडियों में अब तक करीब 3.82 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले खरीद की रफ्तार काफी धीमी है। कुल आवक में से केवल 1.55 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ही सरकारी खरीद हो पाई है, जबकि बड़ी मात्रा में गेहूं अब भी खुले में पड़ा है।
सबसे गंभीर स्थिति उठान को लेकर बनी हुई है। अब तक केवल 4 हजार मीट्रिक टन गेहूं का ही उठान हो सका है, जिससे मंडियां पूरी तरह भर चुकी हैं। जगह की कमी के चलते नई फसल लेकर आ रहे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर गेहूं के ढेर मुख्य सड़कों तक पहुंच गए हैं, जिससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
बारदाने की किल्लत बरकरार
राहत की बात यह है कि विभाग का पोर्टल फिलहाल सुचारू रूप से चल रहा है और गेटपास काटे जा रहे हैं। हालांकि सोमवार रात को तकनीकी खामी के कारण पोर्टल कुछ समय के लिए बंद रहा। किसानों की सुविधा के लिए मैनुअल गेटपास की व्यवस्था भी की गई। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर बारदाने (खाली बोरियों) की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। एक ओर उठान नहीं हो रहा, वहीं बारदाना न मिलने से गेहूं की भराई भी प्रभावित हो रही है। धीमी खरीद और उठान के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। मौसम खराब होने या बारिश की स्थिति में खुले में पड़ा गेहूं खराब होने का खतरा भी बना हुआ है।
सीजन पीक पर है। उठान को लेकर एजेंसी अधिकारियों के साथ बैठक कर तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। खरीद और उठान प्रक्रिया को सुचारू रखने के प्रयास जारी हैं। -सचिव नरेंद्र ढुल, मार्केट कमेटी कैथल