संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक तेज हो गई है, लेकिन उठान न होने और खरीद प्रक्रिया की सुस्ती के कारण व्यवस्था चरमरा गई है। हालात यह हैं कि मंडियां गेहूं के कट्टों से अटी पड़ी हैं और जगह-जगह चट्टों के अंबार लग गए हैं। इससे किसानों को अपनी फसल उतारने के लिए जगह तक नहीं मिल रही। आरोप है कि लापरवाही की वजह से मंडियों में जाम की स्थिति बन गई है।
अब तक मंडियों में करीब 1.23 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, जबकि सरकारी एजेंसियां केवल 43 हजार मीट्रिक टन की ही खरीद कर पाई हैं। यानी आवक के मुकाबले खरीद की रफ्तार आधे से भी कम है। किसान कई दिनों से अपनी फसल लेकर मंडियों में डेरा डाले बैठे हैं, लेकिन धीमी खरीद प्रक्रिया उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है।
खरीद में देरी का मुख्य कारण नमी को बताया जा रहा है, लेकिन किसानों का आरोप है कि एजेंसियां नमी का बहाना बनाकर खरीद टाल रही हैं। किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि फसल पूरी तरह तैयार है, फिर भी अधिकारी मापदंडों का हवाला देकर खरीद को लटका रहे हैं।
तोल में गड़बड़ी के आरोप : नई अनाज मंडी में गेहूं की तोल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटों पर कट्टों का वजन 200-300 ग्राम तक अधिक दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक वजन कम होता है। इससे खासतौर पर अनपढ़ किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नाराज किसानों का कहना है कि अधिकारी मौके पर आकर स्थिति का जायजा नहीं ले रहे, जबकि मौसम खराब होने के कारण वे जल्द से जल्द अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं।
ट्रांसपोर्टरों को टेंडर जारी, उठान की उम्मीद
बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने नए ट्रांसपोर्टरों को टेंडर जारी कर दिए हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए गए और उठान कार्य के लिए नए टेंडर अलॉट किए गए। प्रशासन को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में मंडियों से गेहूं का उठान सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा, जिससे जाम की स्थिति से राहत मिलेगी।
कट्टों को जल्द से जल्द गोदामों तक पहुंचाना प्राथमिकता है। टेंडर अलॉट कर दिए गए हैं और जल्द ही उठान का कार्य शुरू होगा। किसानों और आढ़तियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -वरिंद्र कुमार, डीएफएससी