संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भाई उदय सिंह किला परिसर में चल रहे दिव्य गीता सत्संग के दूसरे दिन स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि ये समय न रुकता है, न लौट सकता है और न ही खरीदा जा सकता है। समय का सदुपयोग करना चाहिए, सद्कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म ही पूजा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ होता है। सद्कर्म और भक्ति करके ही प्रभु से जुड़ा जा सकता है।
सत्संग में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता ज्ञान आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि मैं आत्मचेतना हूं, सबके भीतर आत्मा के रूप में निवास करता हूं। आत्मा अमर-अजर है, आत्मा केवल शरीर का त्याग करती है। संत महात्मा न जाने कितने लोगों के जीवन में परिवर्तन करते हैं। उनकी चेतना विराट होती है, संतों के तप का प्रभाव होता है, शरीर के न रहने पर भी चेतना ईश्वर से जुड़ी रहती है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज आज देश-विदेश में गीता ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। जीवन जीने की कला सीखनी है तो गीता का ज्ञान अर्जित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक सोच व संस्कार देने होंगे। उन्हें गीता का ज्ञान देना होगा। भगवान से जुड़ना है तो गीता से जुड़ो, सत्संग से जुड़ो। भक्ति से ही शक्ति की प्राप्ति संभव है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अनुसार भगवत गीता में वर्णित तीन योग- कर्म, भक्ति और ज्ञान जागरूकता का आह्वान हैं। कर्मयोग शारीरिक सजगता की, भक्ति योग मानसिक सजगता की व ज्ञान योग बौद्धिक जागरूकता की प्रेरणा है।
इससे पूर्व दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ भाजपा वरिष्ठ नेता सुरेश गर्ग नौच ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उन्होंने स्वामी ज्ञानानंद महाराज से आशीर्वाद लिया। साथ ही हुडा सेक्टर में बन रहे श्री कृष्ण कृपा सेवा धाम में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। सत्संग में मुख्य रूप से महाराज जी का आशीर्वाद लेने वालों में प्रमुख समाजसेवी सुधीर मेहता, सेवा संघ संस्थापक शिव शंकर पाहवा, संदीप गर्ग, सुभाष कथूरिया, नरेश बत्रा, कृष्ण सिंगला व राकेश गर्ग पहुंचे। इस अवसर नगर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में भीष्म पितामह सरदाना, रमेश गर्ग, प्रयाग राज, नरेंद्र निझावन, सुरेंद्र सरदाना, वीके चावला, अरविंद चावला, अशोक गोयल, अशोक मित्तल, कंवल तनेजा मौजूद रहे।
विद्यार्थियों को जरूर देना चाहिए गीता का ज्ञान
कैथल। आरकेएसडी महाविद्यालय कैथल के सायंकालीन सत्र के सभागार में श्रीमद्भागवद गीता अध्ययन, अध्यापन और आध्यात्मिकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने अपने प्रवचनों से मुख्य वक्ता की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गीता का ज्ञान जरूर देना चाहिए।इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी मां शारदा के सामने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इसमें प्रबंधक समिति के कोषाध्यक्ष श्याम बंसल, आरवीएस के कोषाध्यक्ष सुनील चौधरी शामिल रहे। प्राचार्य डॉ. संजय गोयल ने ज्ञानानंद का स्वागत किया। प्राचार्य प्रभारी डॉ हरिंदर गुप्ता ने आभार जताया। मंच का संचालन डॉ पूजा गुप्ता ने किया। इस अवसर पर डॉ गगन मित्तल, डॉ सोम वर्मा, डॉ मनोज बंसल, डॉ राजीव शर्मा, डॉ मनिका गुप्ता, डॉ मीनू अग्रवाल, डॉ संयोगिता, डॉ रीना, डॉ मीनू भूटानी, डॉ देवी लाल, प्रो कुश आदि उपस्थित रहे। संवाद
जिला जेल में किया दिव्य गीता सत्संग
कैथल। जिला जेल में बुधवार शाम के समय दिव्य गीता सत्संग आयोजित किया। इस मौके पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने प्रवचन किया। अध्यक्षता जेल अधीक्षक अशोक कांबोज ने की। इस मौके पर जेल में बंद बंदियों को श्री गीता के 18 श्लाेकों का उच्चारण करवाया। सभी को संदेश दिया कि आप प्रतिदिन श्री दिव्य गीता के श्लोक कंठस्थ याद करें। सभी बंदियों ने बड़े सौहार्द पूर्ण माहौल में दिव्य गीता सत्संग सुना। इस मौके पर जिला जेल उप-अधीक्षक सुरेंद्र कुमार, सहायक अधीक्षक नरेश कुमार, बलजीत सिंह सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। संवाद