संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इनेलो में घर वापसी करने व पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद रामपाल माजरा अब इनेलो से कलायत से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इसके माजरा की ओर से जल्द की तैयारियां शुरू कर दी जाएगी। वहीं, माजरा ने इनेलो को नई पार्टी न बताकर पुरानी पार्टी ही बताया है। इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इनेलो उनकी पुरानी पार्टी है। यह जमीन से जुड़ी हुई और वह भी जमीन से जुड़े हुए नेता हैं।
कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के सवाल पर माजरा ने कहा कि कभी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं से कोई बातचीत नहीं हुई है। कहा कि वे संगठन की मजबूती के लिए पहले भी कई बार पूरे प्रदेश में काम कर चुके हैं। इस दौरान वे जेल भरो आंदोलन में भी शामिल हुए थे। चुनाव लड़ने पर माजरा ने कहा कि लोकसभा कुरुक्षेत्र से पार्टी के प्रधान महासचिव अभय चौटाला स्वयं उतर चुके हैं। ऐसे में वे आने वाले समय में जिले की कलायत विधानसभा क्षेत्र सीट से पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
माजरा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला से पारिवारिक संबंध रहे हैं। जब भी पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला या अभय चौटाला आते हैं तो रामपाल माजरा से मुलाकात करने के लिए उनके घर पर पहुंच जाते हैं।
करीब 10 दिन पहले ही अभय चौटाला ने रामपाल माजरा के निवास पर पहुंचकर उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का न्योता दिया था, लेकिन माजरा ने इसे अस्वीकार कर लिया था।
माजरा का राजनीति सफर
रामपाल माजरा इनेलो से दो बार लगातार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2000 में वह इनेलो की सरकार में सीपीएस भी रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत वर्ष 1978 में गांव माजरा नंदकरण की सरपंची से की थी। माजरा ने समता पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ते हुए 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के उम्मीदवार नर सिंह ढांडा को हराकर पहली पार विधायकी हासिल की थी। इसके बाद वह इनेलो पार्टी में शामिल हुए और उन्होंने 2000 में पहली बार इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के तेजेंद्र पाल मान को पराजित कर पाई की विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। जब इनेलो की सरकार बनी तो वह सीपीएस बने थे, लेकिन वे वर्ष 2005 के चुनाव में वह तेजेंद्र पाल मान से हार गए। माजरा ने 2009 में कलायत विधानसभा से इनेलो टिकट पर चुनाव लड़ा और तेजेंद्रपाल मान को हरा तीसरी बार विधायक बने। वर्ष 2014 के चुनाव में वह निर्दलीय उम्मीदवार जयप्रकाश जेपी से हार गए थे। वर्ष 2019 में उन्होंने इनेलो को छोड़ कर भाजपा का दामन थामा, लेकिन वे यहां पर अधिक दिन नहीं रहे। कृषि आंदोलन के चलते हुए किसानों के पक्ष में भाजपा को छोड़ दिया था। अब एक बार फिर से इनेलो में घर वापसी करते हुए इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष बने हैं।