संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रामायण रचयिता एवं आदि कवि महर्षि वाल्मीकि प्रकट दिवस पर जगह-जगह हुए आयोजनों को धूमधाम से मनाया गया। रेलवे स्टेशन के निकट वाल्मीकि आश्रम से विशाल भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
वाल्मीकि समाज की ओर से आयोजित इस शोभायात्रा में महर्षि वाल्मीकि की झांकियों के साथ-साथ कई ऋषियों और संतों की भी झांकियां शामिल हुई। ढोल-ताशे के साथ निकाली गई इस शोभा यात्रा में वाल्मीकि समाज के कई नेता शामिल हुए।
इस मौके पर वाल्मीकि समाज के अध्यक्ष विनोद बौद्ध ने बताया कि विशाल शोभा यात्रा रेलवे स्टेशन के निकट वाल्मीकि आश्रम से शुरू हो चंदाना गेट, प्रताप गेट, डोगरा गेट, सीवन गेट, व अन्य स्थानों गुजरी। शोभायात्रा का स्वागत शहर के विभिन्न स्थानों पर किया गया। रास्ते में विभिन्न स्टॉल लगाए गए।
लोगों ने हलवे का प्रसाद वितरित किया। शहर के सभी चौराहों को बड़े ही सुंदर ढंग से सजाया गया। झांकियों में राम लक्ष्मण व हनुमान की वानर सेना, लव-कुश, राधा-कृष्ण, भोले की बारात व विभिन्न बैंड बाजों के साथ शहर में रवाना हुई।
राजकीय कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल बेदी ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने रामायण के रूप में एक अद्भुत अनुकरणीय रचना हमें दी है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम हमारी आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं। विनोद बौद्ध व राकेश बिड़लान ने आदिकवि वाल्मीकि के बारे में कहा कि वह एक महान विचारक ए चिंतक और महाज्ञानी थे।
युवाओं को उनके बताए मार्ग पर चलकर नशे और अन्य बुराइयों से दूर रहकर जीवन को सफल बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। इस मौके पर श्याम लाल, कुलदीप, विशाल, राकेश बहादुर, विमल, रविंद्र गोकल, दीपक, विशाल व अजय मौजूद रहे।
वहीं, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में वाल्मीकि जयंती सामूहिक यज्ञ के बाद गोष्ठी का आयोजन कर मनाई गई। विश्वविद्यालय में स्थापित नवकुण्डीय यज्ञशाला में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सदस्यों, गैर शैक्षणिक सदस्यों सहित अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने मिलकर भगवान वाल्मीकि का पूजन किया और विश्वशांति के लिए हवन में आहुतियां दी। यज्ञ के बाद सेमिनार हॉल में ‘वाल्मीकीय रामायण में गुरुशिष्य परंपरा’ विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विश्वेश्वरानंद वैदिक शोध संस्थान होशियारपुर के पूर्व निदेशक प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की संस्कृत विभाग की अध्यक्षा प्रो. कृष्णा देवी ने व्याख्यान दिया । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने की। इस अवसर पर साहित्य संस्कृति संकाय अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक व वेदवेदांग संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सुरेंद्र पाल वत्स मौजूद रहे। इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय में वाल्मीकि जयंती पर महर्षि वाल्मीकि को नमन करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सायंकालीन सत्र की प्राचार्या प्रभारी श्वेता तंवर ने अपने वक्तव्य में उनके जीवन पर प्रकाश डाला। डॉ. दीपा व डॉ. हेमलता ने भी संबोधित किया।
पायल और सिमरन द्वारा भाषण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डाला गया और मोनिका व अनु ने कविता पाठ द्वारा महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं से छात्राओं को अवगत करवाया। अंत में सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।