गुहला-चीका। राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा एवं पतंजलि योग समिति चीका की ओर से श्री विश्वकर्मा मंदिर में पर्यावरण शुद्ध एवं समृद्धि के लिए हवन किया गया। आचार्य सत्यवीर शास्त्री ने हवन कराया। सभी ने देश में खुशहाली और समाज के कल्याण के लिए आहुतियां प्रदान की। समाज में सुख शांति समृद्धि स्वास्थ्य दीर्घायु यश वैभव एवं पर्यावरण की शुद्धि की कामना की।
इस अवसर पर वेदों के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। मुख्य यज्ञमान पतंजलि योग समिति जिला प्रभारी हरिओम शोकल रहे। राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा के प्रधान सुरेंद्र आर्य ने कहा कि वर्तमान परिवेश में वेदों का प्रचार-प्रचार जरूरी है। सभी समस्याओं का समाधान वेदों में छिपा है। हमें अपने बच्चों को वेदों से जोड़ना चाहिए। जिस घर में वेदों की ऋचाओं का वाचन होता है वहां से नकारात्मकता दूर हो जाती है।
पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी हरिओम शोकल ने कहा कि भारतवर्ष आदि काल से ही ज्ञान और विज्ञान का प्रकाश पुंज एवं स्त्रोत रहा है। इसी धरा पर ऋषि मुनियों ने वेद की ऋचाओं का अध्ययन किया। इसका मूल वैदिक सिद्धांतों से वैदिक संस्कृति एवं सामाजिक जीवन मूल्य और परंपराओं को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया गया। पराधीन मध्यकाल में समाज में फैली अज्ञानता, कुरीतियां, पाखंड, अंधकार और अविद्या को दूर करने के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती ने वैदिक विधान के अनुसार आर्य समाज का गठन किया था।
आर्य समाज ने राष्ट्र की स्वाधीनता आंदोलन के साथ समाज सुधार आंदोलन भी समानान्तर चलाया। नारी शिक्षा ऊंच -नीच, जाति प्रथा, छुआछूत दलित एवं सामाजिक भेदभाव का निराकरण किया। आर्य हर्षित शर्मा, विक्की, अमित जिंदल ने व्याख्यान में कहा कि व्यक्तिगत एवं सामाजिक उन्नति के लिए अष्टांग योग में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, शौच, तप, संयम, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान इत्यादि यम और नियमों के व्यावहारिक वैधानिक प्रयोग मनुष्य और समाज उन्नति के आधार स्तंभ है। इस अवसर पर पतंजलि प्रवक्ता गुरमीत सीड़ा, सुशील जिंदल, नन्दलाल, तरसेम चंद, बॉबी, आर्य आदि मौजूद रहे।