बलवान सिंह शास्त्री प्रवचन देते हुए। विज्ञप्ति
गुहला-चीका। खरौदी रोड स्थित निरंकारी सत्संग भवन चीका में 15 अगस्त के उपलक्ष्य में मुक्ति पर्व दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में अंबाला से पहुंचे महात्मा बलवान सिंह शास्त्री ने श्रद्धालुओं को सेवा, सिमरन और सत्संग का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को वास्तविक मुक्ति तभी प्राप्त हो सकती है, जब वह अपने जीवन में फैले भ्रमों और अज्ञानता से मुक्त हो। केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन के विकारों और भ्रमों से मुक्ति बहुम जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मुक्ति पर्व माता बुद्धवंती, राजमाता, सतगुरु बाबा गुरबचन सिंह तथा सतगुरु माता सविंदर हरदेव की पावन स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का ज्ञान प्राप्त होता है और सेवा व सिमरन से जीवन में विनम्रता तथा आध्यात्मिक शांति आती है। कार्यक्रम के दौरान कवि दरबार का भी आयोजन किया गया। जिसमें नम्रता और गगन ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। इस अवसर पर शिक्षक महात्मा राकेश कुमार, महिला संचालिका बहन बलविंदर कौर, सुरेश माटा, गुरदेव सिंह, राजेंद्र अंबाला, निर्मल सिंह, सुच्चा सिंह सुल्तानिया, पवन कुमार, लाली, गुरमीत सिंह, सुखविंदर सिंह प्रचारक माैजूद रहे। कार्यक्रम की जानकारी निरंकारी प्रेस प्रवक्ता बलदेव सिंह ने दी। संवाद