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Kaithal News: पिछले साल 72, अब तक 83 जगह जलाई पराली

Wed, 16 Oct 2024 03:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले में अब तक पराली जलाने के पिछले साल की अपेक्षा अधिक मामले आए हैं। पिछले साल 15 अक्तूबर तक 72 मामले थे लेकिन इस बार अब तक 83 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, जिले में अब किसानों पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।

गौरतलब है कि पिछले साल 15 अक्तूबर तक जिले में 35 किसानों पर पराली जलाने के मामले केस दर्ज किया गया था जबकि 220 मामलों में लगभग चार लाख रुपये जुर्माना लगाया गया था। हालांकि जिले में अभी तक एक भी एफआईआर पराली जलाने के मामले में दर्ज नहीं की गई है।
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गौरतलब है कि जिले में पिछले कुछ दिनों से पराली जलाने के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में जिला प्रशासन की जागरूकता भी बेअसर हो रही है, क्योंकि रात के समय खेतों में आग लगाई जा रही है। हालांकि जिला प्रशासन ने इस बार कृषि विभाग के साथ पटवारियों, नंबरदारों, सरपंच के अलावा पुलिस को पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए लगाया गया है।

इसके बाद से पुलिस की ओर से विभिन्न गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर ग्रामीणों सहित किसानों को जागरूक किया जा रहा है। पराली जलाने के मामले सामने आने के बाद अब दोपहर बाद वायु प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को दोपहर के समय वायु प्रदूषण का स्तर 152 पर दर्ज किया गया था। यह मंगलवार शाम चार बजे 111 दर्ज किया।

पहले सैटेलाइट से निकाली जाती है लोकेशन, इसके बाद की जाती हैं जांच ः पराली जलाने के मामलों में कृषि विभाग की ओर से शुरूआत में पहले सैटेलाइट से लोकेशन निकाली जाती है। इसके बाद आग लगाने की लोकेशन की जांच की जाती है।

अफसरों के मुताबिक, यदि यह लोकेशन सही होती है तो इस पर संबंधित खेत के किसान को जुर्माना लगाया जाता है। यदि इसके बावजूद किसान नहीं मानते तो विभाग उसके खिलाफ संबंधित क्षेत्र के थाना में एफआईआर दर्ज करवाता है।

कंट्रोल रूम किया गया है स्थापित

पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए कृषि विभाग ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। जहां कोई भी व्यक्ति सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक सूचना दे सकता है। कंट्रोल रूम के दो नंबर जारी किए गए हैं 70156-27885 व 70155-64644 पर कॉल करें।

कृषि विभाग के सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि जिले में अब तक पराली जलाने के 83 मामले आ चुके हैं। इसमें करीब 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।

पिछले साल अक्तूबर माह तक 72 केस भी दर्ज किए गए थे। किसानों से अपील है कि धान के अवशेषों में आग न लगाएं। बताया कि प्रशासन के आदेशों के तहत कृषि विभाग लगातार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहा है।

पराली प्रबंधन करने वाले 20,481 किसानों के खातों में 21.87 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। अब फसल अवशेष परेशानी ना होकर कमाई का साधन बन गया है। सरकार भी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में देती है। इसके लिए www.agriharyana.gov.in पर जाकर किसान अपने आवेदन

कर सकते हैं। -डॉ. विवेक भारती, डीसी, कैथल।
पूंडरी में भी अवशेष जलाने की हो रहीं घटनाएं
पूंडरी। धान कटाई के बाद अवशेषों में आग लगाने का सिलसिला तेज हो गया है। शाम होते ही आग के कारण लोगों की आंखों में जलन की शिकायत रहती है। रात के समय पूरा वातावरण धुएं से भर जाता है। कई बार रात के समय सड़क से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है।

खेतों में आग लगाने वाले कई किसानों का कहना है कि प्रशासन पहले अवशेष को खत्म करने का उपाय करें फिर वे आग नहीं लगाएंगे। उधर, मंडी में धान की सफाई में प्रयोग में लाए जाने वाले पंखों से जो धूल उड़ती है, उससे पहले ही वातावरण में धूल धूल रहती है। पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण मंच के प्रधान अनिल आर्य ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि खेतों में बचे अवशेषों को आग लगाने पर सख्ती से कार्रवाई करे।
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उन्होंने कहना कि आग लगाने से वातावरण में न केवल आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, बल्कि जहरीली गैसें भी हमारे वातावरण को नुकसान पहुंचाती है। जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। उन्होंने अवशेषों को आग लगाने पर कड़ा प्रतिबंध लगाया जाए। संवाद
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