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Kaithal News: गांव मूंदड़ी के लाल का स्टार्ट अप लुधियाना में सम्मानित

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कैथल। कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं होती। कैथल के गांव मुंदड़ी के रहने वाले लवलेश दत्त ने इसे साबित करके दिखाया है। उन्होंने एक स्मार्ट डिवाइस बनाई है, जो महिलाओं की छेड़छाड़ से रक्षा करती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई जादुई छड़ी को उन्होंने ‘रक्षक’ नाम दिया है। लुधियाना में उनके इस स्टार्ट-अप को 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिला है।
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लुधियाना में 14 व 15 दिसंबर को आईएम पंजाब स्टार्टअप के शिविर में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसमें उन्होंने ‘रक्षक’ के फायदों से अवगत करवाया। नतीजा उनके स्टार्टअप को यह पुरस्कार मिला। इस सफलता से उनकी टीम के सदस्य कोमल रोहिल्ला व अनीश कुमार भी काफी उत्साहित हुए हैं। लवलेश दत्त ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा मद्देनजर ‘रक्षक’ को मार्केट में लांच किया है। इसकी शुरुआती कीमत 3000 रुपये है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय व अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए आईडी कॉर्ड पर विशेष छूट प्रदान की जाती है। छात्राओं को यह स्टार्टअप महज 2000 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है।
चंडीगढ़ के पास खरड़ स्थित चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में लवलेश एमबीए के छात्र हैं। बिजनेस संकाय के छात्र होने के बावजूद अपनी रुचि के चलते वह तकनीकी क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। उन्हें रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी को जानने का काफी शौक है। इसके चलते वह यूट्यूब और इंटरनेट के अन्य माध्यमों से नए-नए प्रयोग करते हैं। वह बताते हैं कि नौंवी कक्षा से ही वह इस कार्य में जुट गए थे।
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रक्षक के कार्य
लवलेश दत्त ने बताया कि अब महिलाएं अपने आपको असुरक्षित महसूस नहीं कर सकेंगी। उनके लिए ‘रक्षक’ सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि महिलाएं जब भी कहीं बाहर जाएं तो उन्हें इसे अपने साथ रखना होगा। यह उपकरण महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया है। मुसीबत की स्थिति में इसका बटन दबाने पर अपराधी को छूने पर 400 वोल्ट का करंट लगता है। इससे बदमाश की मौत नहीं होगी लेकिन उसे जोर का झटका जरूर लगेगा। इससे महिलाएं सुरक्षित रह सकती हैं। यह रक्षक 10 मिनट तक चार्ज लगाने से एक महीने तक निरंतर कार्य करता है।
रिकॉर्ड में दर्ज कराया नाम
लवलेश ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने एक डस्टबिन भी बनाया था, जो सेंसर टेक्नोलॉजी पर कार्य करता है। इसमें इको सेंसर लगाया गया है। इसके तहत यदि इसके आगे से कोई व्यक्ति गुजरेगा तो यह उसे बोलकर कूड़ा डालने के लिए कहेगा। इसमें कोडिंग सिस्टम के तहत आवाज रिकॉर्ड करके डाली गई है। यह डस्टबिन धूप से चार्ज होता है। लवलेश अपने प्रयोग के बलबूते दो बार इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एक बार एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और एक बार वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं। स्मार्ट डस्टबिन बनाने पर नाम दर्ज हुआ है। इसके अलावा यूनाइटेड नेशन की ओर से लवलेश को कर्मवीर चक्र भी मिल चुका है।
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