सीएम द्वारा गोद लिए जाने के बावजूद लंबे समय से विकास परियोजनाओं की बाट जोह रहे गांव क्योड़क की ओर अब प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि गांव के लिए कई परियोजनाएं ना केवल मंजूर हुई हैं, बल्कि उन पर काम भी शुरू हो गया है।
कोटीकूट तीर्थ का अधिकतर कागजी काम पूरा
मुख्यमंत्री द्वारा गांव के जिस ऐतिहासिक कोटीकूट तीर्थ के जीर्णोद्धार का एलान किया गया था। उसके लिए जमीन का फैसला हो गया है। तीर्थ की डिजाइन एवं अन्य प्लानिंग कार्य भी पूर हो गए हैं। शीघ्र ही जीर्णोद्धार कार्य होगा। जिससे पूरे गांव को काफी लाभ मिलेगा। गांव के लोगों की आस्था इस तीर्थ से जुड़ी है। सीएम ने गांव में आयोजित कार्यक्रम में इस तीर्थ के जीर्णोद्धार का एलान किया था।
तालाबों पर बनेंगे दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
गांव में कुल पांच तालाब हैं। जिनकी साफ-सफाई के लिए बजट अलॉट किया जा रहा है। करीब 60 लाख रुपये की राशि से ये तालाब साफ-सुथरे होंगे। गांव के दो बड़े तालाबों पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। जिससे इन तालाबों के पानी को साफ कर कृषि व अन्य कार्यों में प्रयोग किया जा सकेगा।
बलवंती-क्योड़क मोड़ पर भी बन सकता है ओवरब्रिज
गांव के लोगों ने सरपंच के नेतृत्व बलकार आर्य में मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह के समक्ष मांग रखी थी कि क्योड़क बस अड्डे पर नेशनल हाइवे पर ओवरब्रिज बना दिया गया है। लेकिन बलवंती मोड़ पर भी ओवरब्रिज की जरूरत है। इसलिए यहां भी ओवरब्रिज बनाया जाए। ओएसडी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गांव की गलियों, पुलियों के लिए 2 करोड़
गांव में गलियों व पुलियों के निर्माण के लिए करीब 2 करोड़ रुपये की ग्रांट भी मिल चुकी है। जिससे गलियों की मरम्मत के अलावा नालियों पर पुलिया बनाने का काम किया जा रहा है। इस बजट से गांव में स्वच्छता अभियान को मजबूती मिलेगी। ऐसी करीब 45 पुलियों का निर्माण किया गया है। साथ ही चौपालें भी बनाई जा रही हैं।
लंबी मांग ग्योंग रोड को चौड़ा करने का काम शुरू
गांव के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी काम शुरू हो गया है। क्योड़क से ग्योंग तक करीब 3 किलोमीटर लंबे रोड को चौड़ा करने पर तेजी से काम चल रहा है।
वैसे तो सभी गांवों में स्वच्छता अभियान और तालाबों के ओवरफ्लो होने की समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन क्योड़क के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि तालाबों के माध्यम से पानी खराब ना हो। इसे सकारात्मक ढंग से प्रयोग किया जा सके।
कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी कैथल।