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कैथल: एक पखवाड़े की मेहनत... 60 हजार खर्च... पकड़े गुर्गे

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कैथल। स्वास्थ्य विभाग के दो जिलों की टीमों ने एक पखवाड़े से ज्यादा मशक्कत करने के साथ 60 हजार रुपये खर्च किए... तब कहीं जाकर भ्रूण जांच गिरोह का खुलासा कर दो गुर्गों को दबोचने में कामयाबी हासिल की। गिरोह के गुर्गों ने पहले जांच का कार्यक्रम किन्हीं वजह से स्थगित कर दिया था लेकिन बाद में एक सप्ताह की तिथि देकर महिला को जांच के लिए बुलाया।
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पहले 50 हजार रुपये एडवांस ले लिए और जब कैथल से जांच करवाने के लिए सहारनपुर के लिए चले तो पहले ही 10 हजार रुपये भी वसूल लिए थे। सहारनपुर में महिला को बताया गया कि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़के का है।

यह खुलासा किया गया था पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड की मदद से जबकि इस मशीन को अपातकाल में जैसे स्पोर्ट्स इंजरी आदि होने की स्थिति के लिए बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के दो जिलों की टीमों की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह ऐसे ही कई अन्य लोगों से हजारों की रकम वसूली जा चुकी है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश का ही रहने वाला संदीप इस समय कैथल में रह रहा है। वह लगभग 10 साल से इस धंधे में लिप्त था। घटनाक्रम की शुरुआत गुरुग्राम पुलिस को मिली गुप्त सूचना से हुई थी। कैथल व गुरुग्राम क स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी 17 दिनों से पूरे मामले में लगातार संपर्क में रहे और छानबीन में जुटे रहे।
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एक फरवरी को गुरुग्राम सीएमओ कार्यालय ने कैथल सीएमओ कार्यालय को सूचित किया था। इसके बाद पूरे मामले को गोपनीय बनाए रखा। गिरोह सदस्य इतने शातिर थे कि उन्होंने पहले आठ फरवरी की डेट दी लेकिन अज्ञात कारणों से इस तिथि को स्थगित कर दिया। फिर भी विभागीय टीमों ने हार नहीं मानीं। इसके बाद 16 फरवरी की तिथि निर्धारित की। इस दिन गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग की टीम आधी रात के बाद दो बजे गुरुग्राम से चली। कैथल अस्पताल में सुबह पहुंच कर यहां की टीम से मिली। इसके बाद बस अड्डे के बाहर ग्राहक बनीं महिला को लिया। वहां से सहारनपुर जाकर जांच करवाई। जांच में महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण को लड़का बताया गया। इसके बाद वहां से एक आरोपी को काबू किया। डा. गौरव पूनिया ने बताया कि कैथल में दूसरा आरोपी संदीप गोल्डन पॉम में विवाह समारेेह में गया हुआ था। उसने उक्त बलबीर को भी वहीं पर बुलाया। जिस पर टीम ने मौके पर पहुंच कर उसे काबू कर लिया।

गिरोह सदस्य इतने शातिर थे कि वहां जाने से पहले ही राशि ले ली। उन्होंने पहले 50 हजार रुपये, फिर 10 हजार रुपये कैथल से निकलने से पहले लिए। इस तरह से 60 हजार रुपये की वसूली कर गिरोह सदस्यों ने लिंग जांच करवाई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संदीप मूल रूप से सहारनपुर क्षेत्र का ही रहने वाला है। वह कई सालों से इस धंधे में लिप्त है। असली सच्चाई पुलिस पूछताछ के बाद ही पता चलेगी। संवाद
पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन
ध्वनि तरंगों के इस्तेमाल के जरिए आपके बच्चे की तस्वीर कंप्यूटर के पर्दे पर दिखाई पड़ती है। यह तस्वीर बच्चे की स्थिति और गतिविधि को दिखाती है। अल्ट्रासाउंड जांच के बाद यह पता चलता है कि बच्चा सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं विभागीय टीम के अनुसार ग्राहक बनी महिला को अल्ट्रासाउंड करवाते समय बताया गया कि कैसे पता चलता है कि लड़की है या लड़का। इतना ही नहीं जिस मकान में महिला का अल्ट्रासाउंड किया, वहां कोई अस्पताल जैसा सेट अप नहीं था। एक घर में ही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अल्ट्रासाउंड किया और बताया कि उसके गर्भ में लड़का है।
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