संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। मान्यता है कि नारियों को अखंड सौभाग्य देने वाला व्रत करवा चौथ का है। यह सदा सुहागिन रहने के लिए भगवान से प्रार्थना करने का महापर्व है। यह बात पंडित रविदत्त शास्त्री ने दी।
करवा चौथ पर्व के महत्ता पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए चंद्रमा का पूजन एवं दर्शन कर व्रत पूर्ण करती हैं।
पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि इस दिन निर्जल व निराहार व्रत रखकर रात्रि को जब चंद्रमा उदय होता है। उसके प्रकाश में अपने पति की सूरत को देखकर तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन ग्रहण करती हैं।
उन्होंने बताया कि वस्तुतः करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति के उस पवित्र बंधन का प्रतीक है जो पति-पत्नी के बीच होता है। भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है। शास्त्री ने बताया कि करवाचौथ पति और पत्नी दोनों के लिए नव प्रणय निवेदन और एक दूसरे के प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। इस दिन स्त्रियों को पूर्ण सुहागिन का रूप धारण कर वस्त्राभूषणों को पहनकर भगवान चंद्र देव से अखंड सुहाग की प्रार्थना करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्त्रियां 16 शृंगार करके ईश्वर के समक्ष दिन भर के व्रत के बाद यह प्रण भी लेती है कि वह मन, वचन एवं कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेगी।
उन्होंने बताया कि रविवार को पूरे दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। चंद्रोदय के समय रोहिणी नक्षत्र आ जाएगा। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। इस कारण इस त्योहार का महत्व कई गुना बढ़ गया है। रोहिणी नक्षत्र को दांपत्य जीवन में मिठास और सौंदर्य में निखार का कारक माना गया है।
उन्होंने कहा कि व्रत के संबंध में ऐसी मान्यता है कि पांडवों के वनवास काल में जब अर्जुन तप करने के लिए इंद्रनील पर्वत की ओर चले गए तो बहुत दिनों तक उनके वापस ना लौटने पर द्रोपदी को चिंता हुई। तब श्रीकृष्ण ने आकर द्रोपदी की चिंता दूर करते हुए करवाचौथ का व्रत करने को कहा।प्रभु श्री कृष्ण के कहने पर द्रोपदी ने विधि विधान से व्रत एवं चंद्र देव का पूजन किया। जिससे अर्जुन सकुशल वापस आ गए।
तभी से सुहागिन स्त्रियां इस व्रत को करती आ रही है। करवा चौथ का वास्तविक संदेश दिन भर भूखा रहना ही नहीं अपितु यह है नारी अपने पति की प्रसन्नता के लिए,सलामती के लिए इस हद तक जा सकती है कि पूरा दिन भूखी प्यासी भी रह सकती है। करवा चौथ नारी के लिए एक व्रत है और पुरुष के लिए एक शर्त। शर्त केवल इतनी की जो नारी को कोई कष्ट न दिया जाए।