संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। कौल में एनआरआई एवं ग्रामीणों के सहयोग से गढ़रथेश्वर तीर्थ पर रविवार को दानवीर कर्ण की रथ के पहिए सहित भव्य मूर्ति विधि-विधान से स्थापित की गई। मूर्ति स्थापना से पूर्व प्राण-प्रतिष्ठा के लिए गांव में शोभायात्रा के रूप में परिक्रमा करवाई गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर महंत रामदास ने बताया कि गढ़रथेश्वर तीर्थ कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में स्थित एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल है। महाभारत युद्ध के दौरान यहीं दानवीर कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धंस गया था।
जब कर्ण निहत्थे होकर रथ का पहिया निकालने का प्रयास कर रहे थे, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से धनुर्धारी अर्जुन ने उनका वध किया था। इसी ऐतिहासिक घटना के कारण इस स्थान का नाम गढ़रथेश्वर तीर्थ पड़ा। महंत रामदास ने कहा कि गढ़रथेश्वर तीर्थ पर सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। यहां पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति तनाव से मुक्त होता है। मूर्ति स्थापना और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।