संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत अनाज मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद के तीसरे दिन तक एक लाख 70 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। मार्केट कमेटी सचिव अरविंद श्योकंद ने बताया की कलायत अनाज मंडी में खरीद के लिए हैफेड व वेयरहाउस दो एजेंसियों को अधिकृत किया गया है। अभी तक के तीनों ही दिनों की खरीद हैफेड ने की है। इस समय अनाज मंडी गेहूं से लबालब भर चुकी है।
मंडी परिसर के अलावा व्यापारियों द्वारा अनाज मंडी से बाहर भी गेहूं डलवाया जा रहा है। मंडी में पहले सप्ताह में ही फसल डालने के लिए जगह कम पड़ गई है। आगे जैसे-जैसे फसल की आवक में इजाफा होगा व्यापारियों को फसल अनाज मंडी से बाहर ही डलवाना पड़ेगी। कलायत अनाज मंडी में उठान के लिए दो एजेंसियों को नियुक्त किया है, ताकि कोई दिक्कत न आए।
उधर, अनाज मंडी में मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी को लेकर रामनिवास बडबर ने शिकायत की है कि मजदूरों को सरकारी दामों से बहुत कम मजदूरी दी जा रही है। उनका आरोप है कि बैग की सिलाई का सरकारी रेट दो रुपये चार पैसे प्रति बोरी है पर मजदूर को केवल 40 से 50 पैसा प्रति बोरी मिल रहा है। उनका यह भी आरोप है कि न तो मजदूरों को मंडी में पीने के पानी की सुविधा है तथा न ही कोई सरकारी कैंटीन की सुविधा है। मार्केट कमेटी सचिव अरविंद श्योकंद ने बताया की उनके कार्यालय में इस बारे लिखित में शिकायत आई है। इस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने ठेकेदारों व दोनों मंडी प्रधानों को कार्यालय में बुला कर पूरी जानकारी हासिल की। सभी ने लिखित में दिया है कि ऐसा कुछ भी मामला यर्थाथ में नहीं है। श्योकंद ने कहा कि इस मामले पर पूरी तरह से नजर रखी जाऐगी।
अटल कैंटीन के बारे में कहा कि कलायत अनाज मंडी पहले से ही बहुत छोटी है तथा उसमें कैंटीन के लिए जगह ही नहीं। इसके बावजूद उन्होंने बोर्ड में इस विषय को लेकर लिखित में संवाद शुरू किया है। यदि इस बारे बोर्ड से परमिशन आती है तो कैंटीन को शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाऐगी। मंडी में मजदूरों को दी जाने वाली पेयजल, शौचालयों आदी पर उन्होंने कहा कि कहीं कोई चूक नहीं है तथा वे स्वयं इस मामले में नजर रखे हुए हैं।