न्यायालय द्वारा स्टे के बावजूद घर गिराए जाने के विरोध में इनेलो कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय परिसर में प्रदर्शन किया। साथ ही बेघर हुए लोगों के पुनर्वास एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने इस प्रदर्शन की अगुवाई की। माजरा ने कहा कि यह महज प्रतिनिधिमंडल स्तर का प्रदर्शन था। यदि प्रशासन ने सुनवाई नहीं की तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बता दें कि कलायत में प्रशासन ने तालाब से कब्जे हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान कब्जाधारियों ने न्यायालय का स्टे ऑर्डर अधिकारियों को दिखाया। इसके बावजूद उनके निर्माण को प्रशासन ने गिरा दिया। इसी कार्रवाई के विरोध में सोमवार को इनेलो कार्यकर्ता रामपाल माजरा के नेतृत्व में लघु सचिवालय में एकत्रित हुए। जहां प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी बीच प्रशासन की ओर से सीटीएम को ज्ञापन देने की पेशकश की गई। लेकिन इनेलो नेता डीसी द्वारा ज्ञापन लेने के लिए नीचे आने पर अड़े रहे। बाद में डीसी संजय जून ज्ञापन लेने पहुंचे। जहां माजरा ने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। माजरा ने कहा कि जब दोपहर के समय न्यायालय के स्टे ऑर्डर मिल गए थे तो अधिकारियों ने उन्हें पढ़ने तक की जहमत क्यों नहीं उठाई? अधिकारियों को ऐसी कहां रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। 6 जनवरी को शुक्रवार था। 7 व 8 जनवरी को अवकाश था। इन तीन दिनों में प्रशासन ने अपनी कब्जे हटाने की रिपोर्ट कहां प्रस्तुत कर दी। यदि वे सोमवार तक रुक भी जाते तो कहां लेट हो जाते? यदि वे रुक जाते तो शायद न्यायालय के स्टे ऑर्डर के चलते गरीब लोगों के घर उजड़ने से बच जाते।
माजरा ने डीसी से सवाल किया कि तीन दिन हो गए, कलायत में लोग खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं, प्रशासन ने उनके पुनर्वास के लिए अब तक क्या किया? असली दोषी तो वे अधिकारी हैं, जिन्होंने इस जमीन में रजिस्ट्री की, बाद में इंतकाल तक कर दिए। माजरा ने डीसी से मांग करते हुए कहा कि उजाड़ दिए गए लोगों के सर्दी के मौसम में पुनर्वास के प्रबंध किए जाएं। यदि प्रशासन नहीं माना तो इनेलो इस मामले में बड़ा आंदोलन करेगी।
डीसी संजय जून ने माजरा के सवालों पर कहा कि यदि इस कार्रवाई में कहीं किसी अधिकारी की लापरवाही या कमी है, तो इसकी जांच करवाएंगे। प्रशासन ने हाईकोर्ट के फैसले के पालन में ही अवैध कब्जे हटवाए हैं। स्टे की उस समय तक जानकारी नहीं थी।
भाजपा नेता नदारद, प्रशासन ने उजाड़ दिए लोग : माजरा
इससे पूर्व प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माजरा ने कहा कि गरीबों को बेघर करने के समय वहां गरीब और मजलूम के हकों का दम भरने वाले भाजपा नेता भी नदारद रहे। एक तरफ तो हरियाणा सरकार लोगों को आशियाना देने के बड़े-बड़े दावे करती है और दूसरी तरफ बसे बसाए घरों को उजाड़ने का काम भी सरकार की शह पर होता है। कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद भी प्रशासन ने यह कठोर और निर्दयी कदम उठाया है। इस सारी कार्रवाई में नगरपालिका के सचिव की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। प्रदर्शनकारियों में पंडित कंवरपाल करोड़ा, बूटा सिंह, सूबे सिंह कुराड़, जिप्पी शोरेवाला, सुरेंद्र चंदाना, राजा राम माजरा, जसमेर तितरम, रणबीर ढुल फौजी, बलवान कोटड़ा, धर्मपाल छौत, चंद्रभान दयौरा, धर्मबीर कैमिस्ट, बलराज नौच, मोनी बालू, संजीव छौत, रामदिया चावरिया, इंद्र पाई, कंवरपाल राणा, राजेश ढुल पाई, प्रदीप सिंहमार आदि मौजूद थे।