aसंवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के जींद रोड स्थित करण विहार कॉलोनी की 13 वर्षीय अंतिम रवीश आज खेल जगत में एक उभरता हुआ नाम बन चुकी हैं। कम उम्र में ही उन्होंने बॉक्सिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। अंतिम कैथल के राधा कृष्ण स्कूल की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वे खेलों में भी पूरी लगन से भाग लेती हैं।
उनके पिता राजिंदर सिंह जींद रोड पर बालू की दुकान चलाते हैं। साधारण परिवार से संबंध रखने के बावजूद अंतिम के सपनों को साकार करने में उन्होंने और परिवार के अन्य सदस्यों ने कोई कमी नहीं छोड़ी। अंतिम पिछले चार वर्षों से मुक्केबाजी से जुड़ी हैं और उनका निरंतर प्रयास उन्हें लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। आज 13 साल की उम्र में वे राज्य स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनका प्रशिक्षण कैथल के इंडोर स्टेडियम में चल रहा है, जहां वे कोच अमरजीत के मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास करती हैं।
कोच की देखरेख में अंतिम अपनी तकनीक, फिटनेस और स्टैमिना पर विशेष ध्यान देती हैं। उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित है। वे प्रतिदिन सुबह दो घंटे स्टेडियम में अभ्यास करती हैं और शाम को तीन घंटे अतिरिक्त मेहनत करती हैं। इस प्रकार वे रोजाना लगभग पांच घंटे कठोर अभ्यास कर अपने खेल को निखार रही हैं।
अंतिम की उपलब्धियां
उनकी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने हिसार में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। इसके अलावा जिला कैथल स्तर पर भी वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। कम उम्र में राज्य स्तर पर रजत पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। अंतिम का लक्ष्य भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है। उनका सपना है कि वे एक दिन भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतें और अपने माता-पिता तथा जिले का नाम रोशन करें। अंतिम रवीश आज कैथल की उन बेटियों में शामिल हैं, जो यह साबित कर रही हैं कि सच्ची लगन और निरंतर परिश्रम से कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।