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ड्रेनों की सफाई पर जिले में करीब दो करोड़ रुपया खर्च, फिर भी जलकुंभी से अटी पड़ी हैं ड्रेनें

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49-कैथल। ड्रेन के बीच में बना धार्मिक स्थल। - फोटो : Kaithal
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कहने को जिले में सिंचाई विभाग इस सीजन में ड्रेनों की सफाई पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन जिले में पहली बारिश के बाद भी ड्रेनों में जलकुंभी व गंदगी भरी पड़ी हैं। ऐसे में अधिक बरसात होने पर ड्रेनें ओवरफ्लो होने से लोगों की मुसीबत बढ़ सकती है। रविवार को अमर उजाला ने विभिन्न ड्रेनों की पड़ताल की तो जलकुंभी और गंदगी की भरमार मिली।
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प्यौदा रोड से चंदाना की ओर जा रही अमीन ड्रेन पर अमर उजाला की टीम पहुंची, जहां से डयोडखेड़ी की ओर ड्रेन की पटरी से देखा गया तो पूरी ड्रेन जलकुंभी से भरी नजर आई। शहर के निकट की इस ड्रेन का हाल देखकर अन्य ड्रेनों का अंदाजा लगाया जा सकता है। ड्रेन में भारी संख्या में टूटे हुए पेड़ गिरे हुए हैं, जो पानी निकासी में बाधक हैं, लेकिन इन्हें उठाने तक की जहमत नहीं की गई। वहीं जगह-जगह झाड़ियां उगी हैं। इसके अलावा प्यौदा की ओर का बंध भी कई जगह से टूटा हुआ है, जिसकी सुध नहीं ली गई है। इससे पहले बारिश में यह ड्रेन इतनी ओवरफ्लो हो गई थी कि रोहेड़ियां की हद में टूटने की कगार पर थी। डीसी के आदेशों पर कुछ हिस्सों की जलकुंभी को हटाया गया। ऐसे में यदि ज्यादा पानी आ गया तो उपरोक्त कटों में से होकर गांव प्यौदा की ओर निकलेगा, न कि सीधा जाएगा।
सारी राशि खर्च पर डीसी के आदेश पर हो रहे कार्य
विभाग का दावा है कि ड्रेनों की सफाई के लिए आई सारी राशि खर्च की जा चुकी है। जबकि स्थिति यह है कि डीसी प्रदीप दहिया द्वारा दो दिन पहले भी गांव रसुलपुर में अटकी जलकुंभी को अधिकारियों को मौके पर भेजकर मनरेगा मजदूरों से निकलवाया गया। डीसी को रातों को ही अधिकारियों को आदेश देकर ड्रेनों की सफाई करवानी पड़ रही है।
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चंदलाना कौल ड्रेन ओवरफ्लो, फसल पानी में डूबी
ढांड संवाददाता के अनुसार ड्रेन की सफाई न होने के कारण चंदलाना कौल के खेतों में सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले कई सालों से ड्रेन की सफाई नहीं की गई है। अगर प्रशासन द्वारा हर वर्ष ड्रेन की सफाई करवा दी जाए, तो बरसात के पानी का कहर से धान की फसलों को बचाया जा सकता है।
फरल-म्यौली ड्रेन जलकुंभी और घास से अटी
पूंडरी संवाददाता के अनुसार फरल म्यौली के निकट से गुजर रही ड्रेन में जलकुंभी और अन्य झाड़ियां उगी हैं। इसकी सफाई नहीं की गई। इसमें पीछे से पानी जरूर आ रहा है, लेकिन सफाई हो तो पानी और अधिक आसानी से आगे जा सकता है।
सफाई के लिए एक करोड़ की अतिरिक्त मांग हुई अस्वीकृत
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1.57 करोड़ रुपये की राशि से मानस लिंक ड्रेन, ग्योंग लिंक ड्रेन, घग्गर क्रीक ड्रेन, कैथल ड्रेन, पाबसर लिंक ड्रेन, कौल लिंक ड्रेन, कपिलमुनि लिंक ड्रेन, खेड़ी लांबा ड्रेन, पूंडरी ड्रेन नंबर 1 व 2, कोयल ड्रेन, तितरम लिंक ड्रेन, कसान ड्रेन की सफाई करवाई गई। इसके अलावा मनरेगा के तहत 32 लाख रुपये से 7 ड्रेनों अमीन ड्रेन, शेरगढ़ लिंक ड्रेन, नौच मैंगड़ा लिंक ड्रेन, देवीगढ़ ड्रेन, सीवन ड्रेन, पूंडरी ड्रेन, अमीन ड्रेन का हिस्सा व कसान ड्रेन की सफाई करवाई गई है। विभाग को यह राशि भी कम पड़ गई थी, कई ड्रेनों के लिए करीब एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की गई, जिसे विभाग ने अस्वीकृत कर दिया।
क्या कहते हैं अधिकारी
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता जितेंद्र गोस्वामी ने कहा कि विभाग की ओर से 1.57 करोड़ रुपये टेंडर लगाकर, 32 लाख रुपये मनरेगा से व कुछ ड्रेनों की विभागीय स्तर पर सफाई करवाई गई गई है। बारिश में जलकुंभी पीछे से बहकर आ गई है, जो राशि आई थी, वह खर्च कर दी गई है। अतिरिक्त राशि की मांग की गई थी, वह अस्वीकृत हो गई है। प्रत्येक ड्रेन पर हर जगह जाकर सफाई संभव नहीं है, लेकिन जहां भी रुकावट नजर आई, उसे दूर कर दिया गया है।
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