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2013 में बना शहीद ऊधम सिंह पार्क 2016 में बदहाल

Sun, 27 Mar 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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पाकऱ्र्क - फोटो : bureau
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लाखों की लागत से तैयार हुआ शहीद ऊधम सिंह पार्क बदहाल है। पार्क में पीने के पानी, लाइटों से लेकर शौचालयों तक की अव्यवस्था है। जिस कारण यहां आने वाले सैकड़ों की संख्या में शहर के लोगों को परेशानी होती है। शिकायत पर एकाध बार नगर परिषद ने इस पार्क की सुध ली, लेकिन अब हालात फिर से जस के तस बने हुए हैं।
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शहर के प्रताप गेट से लेकर हिंद सिनेमा चौक तक के आस-पास स्थित बस्तियों के लोगों के लिए वर्ष 2013 में इस पार्क का शुभारंभ किया गया था। पार्क में शहीद ऊधम सिंह सहित अन्य शहीदों की प्रतिमाएं भी लगी हुई हैं। इस भव्य पार्क के बीच में फव्वारे सहित फैंसी लाइटों की व्यवस्था की गई थी। पार्क की शुरुआत में सुबह से शाम तक 250 से लेकर 300 की संख्या में महिलाएं यहां योग करने पहुंचती थी। सुबह के समय तो यहां सैर करने वाले लोगों की संख्या 500 से भी पार कर जाती थी, लेकिन नप की अनदेखी ने इसे खंडहर में तब्दील करना शुरू कर दिया है।  

कौन-कौन सी कॉलोनियां हैं आसपास
इनमें प्रताप गेट, डोगरा गेट, अर्जुन नगर, खुराना रोड, माता गेट सहित आस-पास की करीब दर्जन भर कॉलोनियों के लोगों को इस पार्क का फायदा मिलने लगा था। लेकिन अब इसमें हालत ये है कि बैठने की कुर्सियां तक टूट गई हैं।
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क्या कहना है लोगों का
शहरवासी राजेंद्र कुमार ने कहा कि इस पार्क में कई बार की शिकायत के बाद बिजली की मोटर ठीक करवाकर पानी शुरू किया गया था। लेकिन एक बार चलने के बाद यह दोबारा नहीं चली। पेड़-पौधे पानी के अभाव में सूख रहे हैं। वाटर कूलर को खराब होने पर कमरे के अंदर बंद कर दिया गया है।

महिला राजवंती, सुलोचना ने कहा कि यहां रात को चौकीदार की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण आवारा किस्म के लोग यहां रात को एकत्रित होते हैं और जोर-जोर से चिल्लाते हैं। यह आवारा लोगों की शरण स्थली बनता जा रहा है।

शहरवासी धर्मबीर ने कहा कि पीने का पानी तो दूर यहां पौधों तक में पानी नहीं है। कुदरत ही पानी दे दे तो ठीक, अन्यथा यहां पेड़-पौधों को संभालने वाला कोई नहीं है। उद्घाटन के बाद फव्वारा तो चला ही नहीं।

वकील परविंद्र सिंह ने बताया कि इसे बनाकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। सभी अधिकारियों से मिल चुके हैं। लेकिन कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। सभी लाईटें खराब पड़ी हुई हैं। यहां 70 से 80 फैंसी लाइटें लगाई गई थीं। जो खराब पड़ी हैं। घास उग गई है। जिसे संभालने का कोई प्रयास नहीं हो रहा।

सुनील कुमार ने कहा कि यह पार्क शहर के ऐसे इलाके में हैं, जहां आस-पास पार्क की सुविधा नहीं है। इससे लोगों को काफी लाभ हुआ था। लेकिन परिषद के अधिकारियों की लापरवाही एवं अनदेखी के कारण अब यह जगह सुनसान बनती जा रही है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। बैठने के लिए रखी गई कुर्सियां तक टूट गई हैं।

पांच माह से वेतन नहीं
यहां काम करने वाले माली सुरेश कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ इस पार्क में जो भी बनती है, वह देखभाल कर रहे हैं। लेकिन पानी सहित अन्य सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं। पिछले पांच माह से उन्हें वेतन नहीं दिया गया है।
नगर परिषद के एमई राजकुमार शर्मा ने कहा कि लोगों की शिकायत मिली है। पता चला है कि पार्क बदहाल है। इसे पूरी तरह से ठीक करवाया जाएगा। यहां माली की तैनाती के लिए स्वीकृति के लिए लिखा है। स्वीकृति मिलते ही यहां माली तैनात कर इसे ठीक कर दिया जाएगा।
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