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एकता मिशन कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली जा रही पदयात्रा कैथल पहुंची

Tue, 15 Mar 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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यात्रा - फोटो : bureau
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दक्षिण भारत में सामाजिक कार्यों की पहचान बन चुके सत्संग फाउंडेशन के मानव एकता मिशन द्वारा कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली जा रही पदयात्रा सोमवार को कैथल पहुंची। कुरुक्षेत्र मार्ग से कैथल में प्रवेश करने पर भारी संख्या में लोगों ने इस पदयात्रा का स्वागत किया।
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जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए अंबाला की ओर प्रस्थान कर गई। यात्रा 30 अप्रैल को कश्मीर में पहुंच कर खत्म होगी। जिसके माध्यम से मानव एकता का संदेश दिया जा रहा है। विशेष रूप से पिछले कुछ समय में हिंसा ग्रस्त हरियाणा के लोगों को ढांढस बंधाने के लिए पीड़ित क्षेत्रों का भी दौरा किया जा रहा है, ताकि मानव एकता का संदेश दिया जा सके। यहां आईएमए के पूर्व महासचिव डॉ. राजेश गोयल सहित शहर के गणमान्य लोगों ने यात्रा का अभिनंदन किया। मिशन के प्रमुख श्री एम ने यहां बातचीत में बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य शांति, सद्भाव व मानव एकता को मजबूत बनाना है।

कन्याकुमारी से कश्मीर तक करीब 7500 किमी. की पदयात्रा में 70 लोग शामिल हैं। इनमें भी 20 महिलाएं एवं 4 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 12 जनवरी 2015 को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर कन्याकुमारी से शिला पूजन के बाद यात्रा शुरू हुई थी। 14 माह में 9 राज्यों में करीब 6000 किलोमीटर से अधिक पदयात्रा की जा चुकी है। संस्था द्वारा दक्षिण भारत में गरीब लोगों को शिक्षित करने के लिए स्कूल चलाए जा रहे हैं। जिनका खर्च एक बोर्डिंग स्कूल से निकाला जाता है। आगे अकाल तख्त से भी यात्रा को बुलावा आया है। वहां से कश्मीर तक यात्रा जाएगी। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की संस्कृति की विशेषता रही है।
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मुस्लिम परिवार में पैदा हुए श्री एम कर रहे हैं वेदों, गीता एवं उपनिषदों की व्याख्या
मिशन के प्रमुख श्री एम बताते हैं कि उनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ था। लेकिन उससे 5 पीढ़ी पहले उनके पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म कुबूल किया था। उनके घर में आज भी उर्दू बोली जाती है। लेकिन वे स्वयं देश में भारतीय संस्कृति, गीता, उपनिषदों एवं पुराणों का सत्संग करते हैं। बचपन में एक महात्मा ने उनके सिर पर हाथ रखा था। उन्हीं की प्रेरणा से 19 साल की आयु में कॉलेज पूरा करने के बाद हिमालय में चले गए थे।

जहां गुरु महेश्वरनाथ के सानिध्य में तीन साल बिताने के बाद उन्हीं के आदेशों से ग्रहस्थ जीवन में लौटे। उनके दो बच्चे हैं। जो अब विवाहित भी हो चुके हैं। अब गुरु जी के आदेशानुसार फिर से सत्संग शुरू किया है। उनका बचपन का नाम मुमताज अली खन था। लेकिन गुरु जी ने मधुकरनाथ नाम दिया था। इन दोनों नामों के अलावा मानव शब्द में भी पहले एम आने के चलते उनका नाम एम हो गया। डॉ. राजेश गोयल, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. रमन, डॉ. नवीन बंसल, सुशील कुमार, दीपक अग्रवाल, प्रवीण बंसल, प्रो. सीबी सैनी, राजेश कुमार, रोहित खुरानिया, सुनील चुघ, रोहित गोयल सहित अन्य गणमान्य लोगों ने उनका अभिनंदन किया।


इस अवसर पर कर्नाटक के पूर्व डीजीपी डॉ. अजय कुमार, पूर्व प्रिंसिपल सचिव तारा सिंह, आईआईटी दिल्ली से डॉ. साहनी, डॉ. आरएस वानी, मोहन कुमार, शाहनाथ, आयूब, शीबा, कात्यायनी, हुमा, यूरोप से लीना, कैलीफोर्निया से मोनी, क्रेटिनिया सहित अन्य भारी संख्या में लोग शामिल थे। पदयात्रा में शामिल सदस्य लोग बैनर लिए हुए थे और यात्रा निकालने के उद्देश्य की जानकारी दे रहे थे।
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