आज 1 नवंबर को कैथल का जन्मदिन है। हमारा कैथल आज 31 साल का हो गया है। इस 31 साल के दौरान कैथल ने अभूतपूर्व तरक्की की है। कृषि हो, खेल हो, राजनीति हो या कोई अन्य क्षेत्र। हरियाणा में कैथल जिला अहम स्थान रखता है। गेहूं, चावल के रिकॉर्ड उत्पादन के साथ-साथ आज कैथल में उत्पादित शहद, प्लास्टिक के पाइप, शीट्स या कृषि उपकरण पूरे देश में अलग पहचान बनाए हुए हैं। राजनीति में छह विधानसभा सीटों की बजाय अब यहां चार विधानसभा सीटें हैं। लेकिन इस दौरान कैथल ने अनेक बड़े राजनेता दिए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय फलक पर एक से बढ़कर एक जिम्मेवारी हासिल कर रहे राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला कैथल विधानसभा से चुनाव लड़ते हैं। वहीं हरियाणा की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कमलेश ढांडा, हैफेड के कैलाश भगत, पयर्टन निगम के रणधीर गोलन, डेयरी विकास निगम के चेयरमैन रणधीर सिंह कैथल जिले से हैं।
कैथल में है 48 कोस की परिधि के 50 से अधिक तीर्थ- पौराणिक महत्व अनुसार कैथल में आपगा नदी बहती थी। वहीं आधुनिक काल से पहले यहां दिल्ली से लाहौर तक पुराना मार्ग था। गांव बाबा लदाना में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के गुरु स्वामी तोतापुरी महाराज की समाधि है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु रहे हैं। यह क्षेत्र पुराने समय से ही व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। आजादी के समय यहां पर काफी संख्या में दालों की मिलें थीं। उनकी कजगह आज राइस मिलों ने ले ली है। करीब 100 से अधिक राइस मिले जिले में हैं। इसके अलावा महाभारत काल के 48 कोस की परिधि के 50 से अधिक तीर्थ कैथल जिले में हैं। नवग्रह कुंड, श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, अंबकेश्वर मंदिर, ऐतिहासिक बावड़ी, रावण के नाना का गांव पोलड़, कपिलमुनि ऋषि की तपोस्थली कलायत हो या फिर मूंदड़ी में लवकुश तीर्थ। यहां कण-कण में महाभारत व रामायण से जुड़े तीर्थ हैं। शहर में दो ऐतिहासिक गुरुद्वारे, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी के चरण पड़ें, वे ृआज श्रद्धा का केंद्र हैं।
राजनीतिक उतार-चढ़ाव का रहा है विकास पर असर- वर्ष 1989 में कैथल जब जिला बना, उस समय सुरेंद्र मदान कैथल विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। वे बाद में मंत्री भी बनें। इसके बाद लाला चरणदास यहां से विधायक बनें और प्रदेश में वित्त मंत्री बनें। इसके बाद लीलाराम विधायक बनें। वर्ष 2005 से लेकर 2015 तक यहां से पहले शमशेर सिंह सुरजेवाला, फिर 2009 व 2015 में रणदीप सुरजेवाला विधायक बनें और प्रदेश में कई मंत्रालयों के कद्दावर मंत्री रहे। इस समय लीला राम विधायक हैं। इसके अलावा रामपाल माजरा इनेलो सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे। गुहला से कई बार विधायक रहे दिल्लू राम बाजीगर भी मुख्य संसदीय सचिव बनें। कलायत से एक बार विधायक बनीं गीता भुक्कल शिक्षामंत्री रहीं। पाई से ही विधायक बनें स्व. तेजीमान व नर सिंह ढांडा भी मंत्री रहे हैं। पूंडरी से विधायक बनें स्व. ईश्वर सिंह विधानसभा स्पीकर रहे हैं। वहीं नरेंद्र शर्मा भी मंत्री रहे हैं। सुल्तान जड़ौला भी मुख्य संसदीय सचिव रहे हैं। जिले से आज तक एक भी राजनेता सांसद नहीं बन पाया है।
शिक्षा के क्षेत्र में कैथल- जिले में मौजूदा समय में 595 सरकारी व 378 प्राइवेट, आरोही स्कूल तीन, कस्तूरबा गांधी स्कूल दो, नवोदय विद्यालय एक है। इसी प्रकार जिले में कुल प्राइमरी स्कूल 426, कुल मीडिल स्कूल 207, हाई स्कूल 100, सीनियर सेकेंडरी स्कूल 246 है। इसी आंकड़े के आधार पर जिलेभर में कुल 979 स्कूल हैं।
हरियाणा-पंजाब के अलग होने के बाद कैथल एक नवंबर 1989 अस्तित्व में आया। पहले जहां शहर के अस्पताल के अलावा केवल बड़े गांवों में ही डिस्पेंसरी होती थी, उन्हें बाद में पीएचसी का रूप दे दिया गया। जो अपग्रेड होकर सीएचसी बन गई हैं। पीएमओ डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल के अलावा इस समय जिले में छह सीएचसी, 21 पीएचसी, तीन अर्बन पीएचसी और 145 सब हेल्थ सेंटर हैं। जिले में गुहला, सीवन, कलायत, पूंडरी, कौल व राजौंद सीएचसी हैं। इनमें से राजौंद व पूंडरी 2009 में अपग्रेड होकर सीएचसी बनी हैं। गुहला और कलायत सीएचसी को जनवरी 2020 में 50 बेड के सब डिविजनल अस्पताल की अनुमति मिली है।
वहींगुहला क्षेत्र में इस समय रूरल पीएचसी अरनौली, भागल, अगौंध, खरकां, कांगथली, क्योड़क और पाड़ला में हैं। अरनौली अक्टूबर 2018 में व अगौंध 2019 में बनाई गई। कलायत क्षेत्र के गांव बालू, बाता, देवबन, जाखौली, किठाना व सजूमा में पीएचसी हैं, इनमें से सजूमा पीएचसी सितंबर 2019 में बनी। पूंडरी में करोड़ा, मूंदड़ी, हाबड़ी, पाई, कौल, रसीना, टीक, ढांड, फरल पीएचसी हैं, जिनमें से फरल 2019 में बनी। इस समय ढांड पीएचसी को छोड़कर सभी स्वास्थ्य केंद्र सरकारी इमारतों में हैं। 2012 से पहले जिला नागरिक अस्पताल शहर के बीच में होता था, जिसे वर्ष 2012-13 में जींद रोड पर शिफ्ट कर दिया गया। सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग 2012-13 में बनी। तीन अर्बन पीएचसी, शक्तिनगर, पटेल नगर और पुराना अस्पताल में हैं। इसके अलावा जिले में 145 उप स्वास्थ्य केंद्र भी हैं।