इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय में शुक्रवार की दोपहर अभिभावकों व छात्राओं ने कालेज का गेट ना खोले जाने पर रोष प्रकट किया। दरअसल कॉलेज में इंटर कालेज कल्चरल फेस्ट के तहत विभिन्न विषयों में प्रतियोगिता करवाई गई थी। जिसमें दो बजे तक भी मुख्य गेट ना खोले जाने पर बाहर अभिभावकों व अंदर छात्राओं ने रोष प्रकट करना शुरू कर दिया। छात्राएं गेट पर आतीं, लेकिन उन्हें वापिस भेज दिया जाता। जबकि बाहर अभिभावक उनका इंतजार करते रहे। बार-बार मिन्नतें करने के बावजूद दोपहर 2.30 बजे तक भी छात्राओं को कालेज से बाहर नहीं जाने दिया। कालेज के मुख्य गेट पर अंदर से ताला लगाया गया था।
बाहर निकलने पर छात्राओं ने नाम व फोटो न छापने पर बताया उन्हें जबरदस्ती 3 बजे तक कालेज परिसर में रोके जाने के आरोप लगाए। प्रतिदिन कालेज का गेट 12.30 खुल जाता है।
शिवरात्रि के व्रत के कारण भूखी प्यासी रहीं छात्राएं
शुक्रवार को शिवरात्रि पर्व था। काफी संख्या में छात्राओं ने उपवास रखा हुआ था। उन्हें मंदिर में जाकर जलाभिषेक करना था। लेकिन गेट ना खुलने पर उन्हें अंदर ही रहना पड़ा। छात्राओं को लेने आए अभिभावकों ने भी गेट पर करीब 1 घंटे तक इंतजार किया, लेकिन जब कालेज के गेट का ताला नहीं खोला गया तो अभिभावकों का गुस्सा बढ़ गया। कालेज के सामने महिला पुलिस कर्मचारियों के साथ गेट नहीं खोले जाने को लेकर अभिभावकों की नोक-झोंक भी हुई। दोपहर 2.30 बजे जब एक गाड़ी को कालेज के अंदर जाने के लिए गेट खोला गया तो बहुत सी छात्राएं बाहर निकल आई। इसके बाद फिर गेट को बंद कर दिया।
बाहरी छात्रों को रोकने के लिए बंद किया था गेट : प्रिंसिपल
आईजी कालेज प्रिसिंपल साधना ठकराल ने कहा कार्यक्रम छात्राओं का था और गेट पर कोई ताला नहीं लगाया गया था। छात्राओं की सुरक्षा के लिए केवल बाहरी छात्रों को अंदर घुसने से रोकने के लिए ही केवल गेटमैन ने कुंडी लगाई गई थी। गांवों से आने वाली छात्राओं को तो पहले ही जाने दिया गया था, केवल शहर की छात्राएं कुछ लेट गई हैं। वहीं जो छात्राएं कार्यक्रम में रूकना चाहती थी, उनके लिए हमने बस की सुविधा भी उपलब्ध करवाई थी। हमने जबरदस्ती किसी को नहीं रोका।