संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। चुनावी साल में कैथल इस समय राजनीतिक दृष्टि से हॉट सीट बन गई है। कैथल विधानसभा से भाजपा विधायक लीला राम बड़े प्रोजेक्ट पर काम न होने, विकास कार्यों के लिए बजट जारी न होने के कारण नाराज चल रहे हैं। वहीं हेफेड चेयरमैन कैलाश भगत ने संसदीय क्षेत्र का व्यापारी सम्मेलन करवाकर एक तरह से लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। कांग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला भी सरगर्म हैं।
लगभग छह माह से विधायक लीला राम भाजपा संगठन कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। प्रत्यक्ष तौर पर तो वे बयानबाजी से बच रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू न होने, ग्रामीण क्षेत्र में करवाए गए विकास कार्यों के लिए फंड जारी न होने, शहर में कई निर्माणाधीन भवनों के लिए फंड न मिलने सहित कई कारणों से वे नाराज हैं।
शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर की मौजूदगी में विधायक मंच से कह चुके हैं कि उनके पास एक रुपये की भी ग्रांट नहीं है। वे शिक्षामंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग कर चुके हैं कि पोर्टल की बजाए लोगों के अब सीधे काम न होने चाहिए, ताकि चुनाव से पहले लोगों को परेशानी न हो। देखना होगा कि आने वाले समय में विधायक की यह नाराजगी क्या रंग लाती है।
उधर, भाजपा में ही हेफेउ चेयरमैन कैलाश भगत ने व्यापारी सम्मेलन के माध्यम से एक तरह से लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। उनका प्रयास है कि भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से टिकट दे। सीधा पूछने पर कैलाश भगत ने इतना ही कहा कि चाहे पिछला विधानसभा चुनाव हो या नगर परिषद कैथल का चुनाव हो, उन्होंने पूरी लगन व निष्ठा से पार्टी के लिए काम किया। पार्टी के निर्देशानुसार काम करेंगे।
कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पिछले चुनाव में विधायक लीला राम से 1200 वोटों से पराजित हो गए थे। इसके बाद उन्हें कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव व कर्नाटक का प्रभारी बनाया। जहां पिछले माह कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई है। कर्नाटक की जीत से सुरजेवाला समर्थक उत्साहित है। कांग्रेस नेता सुदीप सुरजेवाला स्पष्ट कर चुके हैं कि रणदीप सुरजेवाला कैथल से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि आने वाले समय में कैथल की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।