कैथल-अंबाला नेशनल हाइवे के फोरलेनिंग के कार्य में कैथल से पिहोवा के बीच कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। हाइवे निर्माण में इस क्षेत्र में पहली बार प्रयोग की जा रही पीक्यूसी तकनीक के माध्यम से सवा फुट से भी चौड़ी कंकरीट की मोटी परत डालकर अत्याधुनिक तकनीक की बड़ी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। सड़क निर्माण कर रही फर्म के अधिकारियों की मानें तो मार्च माह तक पिहोवा तक नई सड़क पर यातायात शुरू कर दिया जाएगा। जिससे कैथल से पिहोवा तक 40 से भी ज्यादा मिनट का सफर महज 20 मिनट का रह जाएगा।
खूनी सड़क के नाम से जाना जाता है हाइवे
दशकों से नेशनल हाइवे होने के बावजूद सिंगल लेन के कैथल-अंबाला नेशनल हाइवे को खूनी सड़क के नाम से जाना जाता है। यहां हर साल काफी संख्या में लोग हादसों में जान गंवाते हैं। लोगों की लंबी मांग के बाद तितरम मोड़ से अंबाला तक करीब 95 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के फोरलेनिंग का प्रोजैक्ट मंजूर हुआ। जिसे टुकड़ों में कंपनियों को टेंडर अलॉट कर फोरलेन बनाया जा रहा है। इस समय तितरम मोड़ से पिहोवा शहर से आगे 5 किलोमीटर तक का एरिया एक कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है।
अंबाला तक काफी जगहों पर यह मार्ग इस समय खस्ता हाल में हैं। जिस कारण वाहन चालक वाया पटियाला या फिर कुरुक्षेत्र होकर चंडीगढ़ या अंबाला जाना पसंद करते हैं।
पहली बार हो रहा है अत्याधुनिक पीक्यूसी तकनीक का इस्तेमाल
नेशनल हाइवे के तितरम मोड़ से पिहोवा से आगे करीब 5 किलोमीटर तक वे नई सड़क का निर्माण पीक्यूसी तकनीक से हो रहा है। जिसमें करीब सवा फुट मोटी कंकरीट की सड़क बनाई जा रही है। इसमें स्टील सहित मजबूती के लिए हर तरह की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। इस एरिया में पहली बार इतनी मजबूती से किसी सड़क का निर्माण हो रहा है।
जर्मनी से आई कंकरीट पेवर मशीन को %