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Kaithal News: प्राकृतिक खेती से जोनी राणा ने बदली कईं किसानों की किस्मत, खुद भी कमा रहे 16 लाख से अधिक सालाना

Tue, 28 Oct 2025 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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अपने खेत में खड़े प्राकृतिक करने वाले किसान जोनी राणा।
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रिपोर्टर- कपिल तंवर
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कैथल। प्राकृतिक खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ रहा है। जिसके जरिए किसानों की जीवन अब और भी आसान हो रहा है किसान अन्य खेती की बजाए प्राकृतिक खेती का रुख अपना रहे हैं। प्राकृतिक खेती के जरिए कैथल जिला के बाता गांव के रहने वाले किसान जोनी राणा 16 लाख रुपये से अधिक की सालाना कमाई कर रहे हैं। जोनी की उम्र 39 वर्ष है. किसान जोनी राणा ने अपनी सोच, मेहनत और देसी तरीकों से खेती के दम पर ना सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आसपास के हजारों किसानों की जिंदगी में भी नई रोशनी भर दी है।

जोनी के पिता की मौत कैंसर से हो गई थी। हालांकि उनका खान-पान ठीक-ठाक ही था, लेकिन फिर भी कैंसर से पिता की मौत होना उनके लिए सदमे से कम ना था। पिता की मौत के बाद मिली सीख ने जोनी को ना सिर्फ प्रगतिशील किसान बना दिया बल्कि आज जोनी प्राकृतिक खेती कर और लोगों को खेती का गुर सिखा सैंकड़ों लोगों की जिन्दगी न सिर्फ संवार रहे हैं बल्कि बचा भी रहे हैं।
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किसान जोनी राणा ने बताया कि साल 2015 में कैंसर से पिता की मौत हो गई। पिता की कैंसर से मौत ने जिंदगी की दिशा बदल दी, उस समय मैं बीए की पढ़ाई कर रहा था, मेरे पिता शाकाहारी थे, फिर भी उन्हें गंभीर बीमारी ने घेर लिया. इस बारे में जब मैंने विशेषज्ञों से बातचीत की तो पता चला कि केमिकल युक्त भोजन ही कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। इस घटना के बाद मैंने प्रण लिया कि मैं केमिकल मुक्त खेती करूंगा। क्योंकि फसल सही रहेगी तो आने वाली नस्ल भी सही रहेगी।

कम लागत और दोगुनी कमाई-

जोनी ने बताया कि वह 8 एकड़ जमीन में धान, गेहूं और दाल की खेती कर सालाना करीब 16 लाख रुपए की कमाई करता हूं। प्राकृतिक खेती में प्रति एकड़ 10-12 क्विंटल धान और 10-13 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता है। धान की बाजार कीमत 8,000-10,000 रुपया और गेहूं की कीमत 7,000-9,000 रुपया प्रति क्विंटल तक है. रासायनिक खेती की तुलना में मेरी उपज की कीमतें लगभग दोगुनी हैं, जबकि उत्पादन लागत आधी से भी कम आती है।

35 एकड़ में बागवानी करने का लक्ष्य-

अब किसान जोनी राणा का लक्ष्य 35 एकड़ में बागवानी करना है। इसकी वो योजना बना रहे हैं। उन्होंने हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी रासायनिक खेती से मुक्त होने की राह दिखाई है। यही कारण है कि दूर-दूर तक जोनी की चर्चा है। लोग उनसे खेती के गुर सीखने पहुंचते हैं।
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देसी कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं जोनी-

जोनी बताते हैं कि वो खेतों में देसी कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, जो वे खुद तैयार करते हैं। देसी कीटनाशक बनाने के लिए वे नीम के पत्ते, लहसुन, प्याज, आक, गाय का गोबर, गोमूत्र और कुछ विशेष जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं। ये सब चीजें कम खर्च में उपलब्ध होती हैं और मिट्टी को नुकसान पहुंचाए बिना फसल की रक्षा करती हैं।


किसान जोनी को मिल चुकें हैं कई अवॉर्ड-

1.साल 2023 में दिल्ली स्थित पूसा आईसीआर में लखपति किसान जोनी को अवॉर्ड मिला।

2.प्रदेश स्तर पर दो साल लगातार किसान दिवस पर बेस्ट किसान का अवॉर्ड मिल चुका।

3.साल 2024 में गुजरात स्थित नेचुरल फार्म यूनिवर्सिटी में रिसोर्स पर्सन की उपाधि मिली।

4.पिछले महीने अगस्त में ब्लॉक लेवल पर भी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन बने।
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