जिले के राजकीय स्कूलों में पड़े जेनरेटर धूल फांक रहे हैं। ये जेनरेटर ना तो विद्यार्थियों के काम आ रहे हैं और ना ही स्टाफ के। करोड़ों रुपये के जेनरेटर्स को जंग खा रही है। सरकार ने वर्ष 2012 में लाखों रुपये की लागत से जिले के करीब 120 हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में जेनरेटर लगाए गए थे। लेकिन विभाग ने केवल वर्ष 2012 में एक बार ही पांच हजार रुपये तेल के लिए दिए थे। उसके बाद विभाग ने स्कूलों में एक रुपये भी जेनरेटर के तेल के लिए नहीं दिया। गर्मी के मौसम में स्कूलों में जेनरेटर होते हुए भी विद्यार्थियों को पसीने में तर बदर होना पड़ रहा है।
पांच वर्ष में केवल एक बार मिला पांच हजार का तेल
2012 में सरकारी स्कूलों में विभाग ने पांच हजार रुपये तेल के लिए दिए थे। इसके बाद विभाग ने स्कूलों में जेनरेटर के तेल के लिए पैसे नहीं दिए। जिसके कारण स्कूलों में पड़े जनरेटर धूल फेंक रहे हैं। जिसका कोई प्रयोग नहीं हो रहा है।
गर्मी व सर्दी में होना पड़ता है परेशान
स्कूल की छात्रा मोनिका, सपना, संगीता, ममता, काजल, सोनिया, हीना ने बताया कि गर्मी के मौसम में लाइट न होने के कारण जहां गर्मी में परेशान होना पड़ता है। वहीं सर्दी के मौसम में कक्षाओं के कमरों में अंधेरा रहता है। छात्राओं ने बताया कि स्कूल में बड़े-बड़े जेनरेटर पड़े हैं लेकिन इनका कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वह तेल के पैसे स्कूल को दें ताकि विद्यार्थियों को सुविधा मिल सके।
जिले के सभी हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में जेनरेटर है। लेकिन विभाग ने 2012 में एक बार तेल दिया था। जिसके बारे में विभाग को पूरी जानकारी दी जा चुकी है। विभाग कोई आदेश देता है तो उस पर अमल किया जाएगा।
शमशेर सिरोही, डिप्टी डीईओ