सरकार के फैसले के बाद तीन दिनों से डीईओ कार्यालय पर डटे जेबीटी अध्यापकों को आखिरकार रोजगार का प्रमाण पत्र मिल गया। रविवार को मेडिकल की प्रक्रिया के बाद अध्यापकों ने डीईओ कार्यालय में ज्वाइन कर लिया। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नवनियुक्त अध्यापकों के चेहरे पर चमक लौट आई और अध्यापकों ने नियुक्ति पत्र हाथ में थामकर खुशियां मनाईं।
विदित रहे कि सरकार की अनुमति के बाद पिछले तीन दिनों से जेबीटी अध्यापक नियुक्ति पत्र के लिए दौड़ रहे थे। पहले दो दिनों तक कागजातों की जांच पड़ताल के बाद शनिवार शाम तक नियुक्ति पत्र ना मिलने पर अध्यापकों को एकबार फिर प्रदर्शन करना पड़ा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद रविवार को जिला अस्पताल में छुट्टी के बावजूद चिकित्सकों का बोर्ड बैठाया गया और अध्यापकों का मेडिकल करवाया गया। इसके बाद उन्हें डीईओ कार्यालय में ही ज्वाइनिंग दे दी गई। सुबह कागजातों की जांच पड़ताल के बाद नियुक्ति पत्र दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
मनजीत पाई को मिला पहला नियुक्ति पत्र
डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा अध्यापकों के दस्तावजे की जांच पूरी होने के बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे पहला नियुक्त पत्र दिया गया। यह नियुक्ति पत्र पाई गांव की मनजीत को मिला। मनजीत ने बताया कि उन्हें यह नियुक्ति एक लंबी जद्दोजहद के बाद मिली है। उसे यह नियुक्ति अपने कार्यकाल के दौरान पूरी जिंदगी याद रहेगी। उसने कहा कि वह पूरी ईमानदारी और लगन से बच्चों को शिक्षा देगी।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद डटे रहे अस्पताल में
रविवार को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नव नियुक्त अध्यापकों जैसे ही नियुक्ति पत्र मिले वे अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल में अध्यापकों का जमघट लगा। इस दौरान अध्यापकों के एक्सरे से लेकर आंखों का नंबर तक जांचा गया। अध्यापक पर्ची कटवाने के लिए कई मिनटों तक लाईन में लगे रहे। इस दौरान ओपीडी से लेकर दवाईयों के कक्ष तक लंबी लाइन लगी रही।
लंबे संघर्ष के बाद मिली नौकरी, 5 माह बाद हो जाएंगे रिटायर
कैथल। रविवार को जब जेबीटी के नवचयनित अध्यापक अपना नियुक्ति पत्र लेने पहुंचे तो उस समय एक बुजुर्ग भी अध्यापकों के कतार में खड़े थे। यह अध्यापक अपने परिवार में बेटी, बेटे या पुत्रवधू का नियुक्ति पत्र लेने नहीं बल्कि खुद के नियुक्ति पत्र को लेने का इंतजार कर रहे थे। बुजुर्ग एक पूर्व सैनिक हैं।
जिला हिसार के गांव मिर्चपुर निवासी जगदीश चंद ने बताया कि वह एक पूर्व सैनिक हैं। सात वर्ष पहले वह सेना में हवलदार के पद पर तैनात थे। जिसके बाद उन्होंने वर्ष 2012 में अध्यापक पद के लिए आवेदन किया था। जिसका परिणाम 2014 में आ गया था। उसमें नियुक्ति के बाद अब ज्वाइनिंग मिली है। अब उनकी उम्र 57 साल 7 महीने है। पांच माह बाद उन्हें सेवानिवृत्त होना पड़ेगा। लेकिन वे अध्यापक बनना चाहते हैं। इस दौरान बच्चों को लगन से पढ़ाएंगे। स्कूली बच्चों को इसी पांच महीनों के कार्यकाल में देश की सेवा करने की प्रेरणा देंगे। जिससे स्कूल के बच्चों में देशभक्ति की भावना पैदा हो सके।
544 अध्यापकों में 515 को मिले नियुक्ति पत्र
डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही ने बताया कि रविवार की देर रात तक जिले में नव नियुक्त 544 में 515 अध्यापकों को नियुक्त पत्र दे दिए गए हैं। 30 अध्यापक अनुपस्थित रहे। इनकी मेडिकल के बाद ही ज्वाइनिंग का रास्ता साफ होगा। 30 मई तक ये अध्यापक नियुक्ति के लिए आ सकते हैं।