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दोपहर को प्रशासन ने दी मौखिक सहमति, शाम को डीसी ने कहा- नहीं दी देवबन में धरने की अनुमति

Sun, 29 Jan 2017 11:37 PM IST
ब्यूरो कैथल
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धरनास्थल पर उमड़ी भारी भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला प्रशासन ने रविवार दोपहर को गांव देवबन में जाटों को आरक्षण आंदोलन के लिए धरने की मौखिक अनुमति दे दी। वहीं शाम को डीसी ने देवबन में किसी भी प्रकार की अनुमति देने की बात से इंकार करते हुए यहां धरने को अवैध करार दे दिया। दूसरी ओर जाटों ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौखिक अनुमति मिलते ही देवबन में कैंची चौक पर धरना शुरू कर दिया। डीसी ने कहा कि जाखौली में अनुमति वाली जगह पर धरना दिए जाने के लिए कहा गया है। देवबन में अवैध रूप से धरना दिया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी। वहीं जाटों का कहना है कि वे देवबन में ही धरना देंगे। उधर, जिस जगह धरना शुरू किया गया है। प्रशासन ने रातों-रात वहां पुलिस चौकी भी बना दी थी। जिसे दोपहर तक हटा लिया गया।
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प्रशासन ने जाटों के आवेदन पर गांव तितरम मोड़ व देवबन में अनुमति ना देकर जाखौली में सशर्त धरने की अनुमति दी थी। लेकिन जाट समाज ने देवबन में ही धरने का ऐलान किया था। जिस कारण रविवार सुबह जाटों द्वारा गांव देवबन में मांगी गई जगह पर प्रशासन ने अस्थाई पुलिस चौकी भी बना दी। बाकायदा वहां पुलिस चौकी देवबन का बोर्ड गाड़ दिया गया। सुबह जाट आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य इस जगह के सामने सड़क के दूसरी ओर पहुंच गए। जहां करीब 12 बजे तक महिलाओं सहित जाट समाज के लोग एकत्रित हो गए। इसके बाद जाट आरक्षण संघर्ष समिति सदस्यों की एसडीएम, तहसीलदार सहित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अस्थाई पुलिस चौकी में ही बैठक भी हुई। इस बैठक में अधिकारी जाटों को उसी चौकी की जगह में धरने की मौखिक अनुमति देकर लौट आए। साथ ही अपने पुलिस चौकी के बोर्ड तक भी उखाड़ लाए। इसके बाद जाटों ने उसी जगह पर अपना धरना शुरू कर दिया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला संयोजक बलवान कोटड़ा व जिला अध्यक्ष प्रवीण किच्छाना ने लोगों से शांति की अपील के साथ धरने में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अप्रिय वारदात ना होने देने, सरकारी काम में बाधा ना डालने की जिम्मेवारी लेते हुए समिति को यहां धरना देने की अनुमति मिली है। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। बलवान कोटड़ा ने कहा कि उन्हें मौखिक अनुमति दी गई थी। लिखित के लिए प्रशासन से बात की जाएगी।

उधर, डीसी संजय जून ने कहा कि अभी देवबन में धरने की अनुुमति नहीं दी गई है। गांव जाखौली में ही धरना शुरू करने के लिए जाट आरक्षण संघर्ष समिति से बातचीत चल रही है। देवबन में दिया जा रहा धरना अवैध है। यह अलग बात है कि उन्हें वहां बैठने से नहीं रोका गया। लेकिन उन्हें स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया गया था। देवबन में किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई थी। यहां बिना अनुमति के धरना दिया जा रहा है। जो गैर कानूनी है। जरूरत पड़ी तो लीगल एक्शन होगा।
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भीड़ बढ़ी तो लौट आया प्रशासनिक अमला
रविवार सुबह प्रशासन ने अस्थाई पुलिस चौकी बनाकर देवबन में डेरा डाल लिया था। वहीं सड़क के दूसरी ओर जाट समाज के लोग एकजुट हो गए। एक बार तो तनाव की स्थिति हो गई थी। महिलाओं सहित लोगों की भीड़ बढ़ी तो किसी भी प्रकार के नुकसान की जिम्मेवारी लेने पर प्रशासनिक अमला लौट आया और अपनी अस्थाई पुलिस चौकी भी साथ ही उठा लाया।

महिलाओं ने डेरा डाला, गीत गाए
धरनास्थल पर पहुंची महिलाओं ने गीत गाकर समय व्यतीत किया। जब तक अनुमति नहीं मिली, वे बजरी के ढेर पर बैठकर गीता गाती रहीं। वहीं बुजुर्गों ने हुक्का गुड़गुड़ाया। लोगों ने ताश खेलकर भी समय व्यतीत किया। समाज के लोग सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे। समिति सदस्यों ने कहा कि 36 बिरादरी के सहयोग से आरक्षण की लड़ाई लड़नी है। धरना किसी समाज के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के साथ है।

प्रशासन की ओर से रविवार सुबह एसडीएम कैथल मनदीप कौर, एसडीएम कलायत ओमप्रकाश, डीएसपी जोगिंद्र श्योराण, बीडीओ राजौंद विरेंद्र सहित खुफिया तंत्र के अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की। वहीं जाट समाज की ओर से प्रशासन के साथ बातचीत के लिए बनाई गई समिति में बलवान कोटड़ा, प्रवीण किछाना, भरत सिंह बैनीवाल, जोगी राम मलिक, मियां सिंह जाजनपुर, गजे सिंह तथा संजय जागलान शामिल थे। तीन दौर की बातचीत के बाद दोपहर करीब साढ़े बारह बजे धरना शुरू किया गया।

मेरी बिना अनुमति के बना दी मेरी जमीन में पुलिस चौकी
गांव देवबन निवासी पूर्व सरपंच राम स्वरूप ने एतराज भी जताया था कि यह जमीन उसकी है। उस पर कौन बैठे और कौन नहीं, यह उसका अधिकार है। परन्तु जिला प्रशासन द्वारा बिना उसकी अनुमति से उसकी जमीन पर कब्जा किया है। यहां पुलिस चौकी बना दी।

नियमानुसार चलेगा धरना
समिति नेता बलवान कोटड़ा व प्रवीण किच्छाना ने कहा कि रविवार के धरने की अध्यक्षता गांव देबवन के पूर्व सरपंच रामस्वरूप ने की। रात की जिम्मेवारी जोगी राम व सोनू की रहेगी। धरना अनिश्चितकालीन समय तक हर रोज सुबह 9 से 5 बजे तक चलेगा। प्रदेश के 19 जिलों में धरना दिया जा रहा है। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती धरना लगातार चलता रहेगा।
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ये है समुदाय की मांगे:-
1- पिछले आरक्षण धरने के दौरान शहीद हुए युवकों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए।
2-  गिरफ्तार युवकों से झूठे केस वापस हो और उनको रिहा किया जाए।
3- आरक्षण की मांग के चलते जितने भी मामले किसी भी तरह के दर्ज हुए हैं, वे सब वापस लिए जाएं।
4-   आरक्षण की मांग के दौरान विकलांग व घायल युवकों को सरकारी नौकरी व मुआवजा दिया जाए।
5- उनके समेत छह जातियों जाट, जट सिख, मुल्ला जाट, बिशनोई, रोड़ तथा त्यागी को आरक्षण मिले।
6- आरक्षण देकर उनको राज्य के साथ-साथ केंद्र भी नौंवीं सूची में शामिल किया जाए।
7-  सरकार उनके साथ किए सभी वादे निभाए।
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