संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कहते हैं, सपना वह नहीं जो बंद आंखों से देखा जाए, बल्कि वह है जिसे खुली आंखों से देखा जाए और उसे पूरा करने के लिए पूरी शिद्दत के साथ प्रयास किया जाए। कुछ ऐसा ही जज्बा है कैथल की डिफेंस कॉलोनी में रहने वाली जैशना सहारन का।
महज 14 साल की उम्र में जैशना ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर दिखाई है। हाल ही में उनका चयन नेशनल स्कूल गेम्स मणिपुर के लिए हुआ है। उन्होंने साबित कर दिया है कि आज लड़कियां न केवल खेल-कूद में बल्कि हर क्षेत्र में लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं।
बुखार में भी नहीं छोड़ा अभ्यास ः जैशना के पिता सुनील सहारन, दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल, ने बताया कि जूडो के प्रति जैशना का जुनून बेहद गहरा है। कठिन परिस्थितियों में भी वह अभ्यास नहीं छोड़तीं। एक बार उन्हें तेज बुखार था, फिर भी वे जिले के सर छोटू राम इंडोर स्टेडियम में कोच जोगिंद्र के पास अभ्यास करने पहुंचीं।
जूडो की शुरुआत जैशना ने जून 2024 में की थी। पिता का कहना है कि वह न केवल खेलों में बल्कि पढ़ाई में भी होशियार हैं। जैशना ओएसडीएवी स्कूल में नौवीं कक्षा की छात्रा हैं और खेल तथा पढ़ाई दोनों के लिए समय निकालती हैं। पिता ने गर्व के साथ कहा, “हमें अपनी बेटी पर बहुत गर्व है। जो कुछ वह पढ़ती हैं, उसे जल्दी याद कर लेती हैं।”
पिता भी रह चुके हैं खिलाड़ी ः जैशना के पिता सुनील सहारन भी पहले बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके हैं और खेलों में कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं।
उपलब्धियां
2024 में जिला और राज्य स्तरीय सब जूनियर जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
2024 में पुणे में आयोजित सब जूनियर राष्ट्रीय जूडो खेलों में भाग लिया।
राष्ट्रीय अखिल भारतीय खेलों में डीएवी पब्लिक स्कूल के 57 किग्रा जूडो वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
जैशना के पिता सुनील सहारन।