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वर्तमान पीढ़ी को इतिहास से अवगत करवाना जरूरी : बंडारू दत्तात्रेय

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12-कैथल। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद भारद्वाज शाल ओढ़ाकर महामहिम का स्वागत करत - फोटो : Kaithal
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के संयुक्त पहल पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम सभी को ऐतिहासिक घटनाओं, महापुरुषों से सीख लेकर देश की अखंडता के लिए कार्य करने का प्रण लेते हुए विकास का रोड मैप तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को इतिहास से अवगत करवाना जरूरी है। इतिहास ही सच्चा शिक्षक है। समय की मांग है कि वर्तमान परिवेश के अनुसार सभी को इतिहास का ज्ञान होना जरूरी है।
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डॉ. भीम राव आंबेडकर राजकीय कॉलेज में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी गोष्ठी का विषय ‘पुरातात्विक एवं साहित्यिक साक्ष्यों के आलोक में भारतीय इतिहास का पुनरवलोकन’ था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने स्मारिका पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी के पुनरोद्धार व उसकी धारा को बहाने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है, जोकि सराहनीय है। राज्यपाल ने महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे सेमिनार पर प्रशंसा जाहिर की। कहा कि यह शोध वास्तविक तथ्यों को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
उन्होंने कहा कि विगत सात वर्षों में महाद्वीप पर खोदाइयों के दौरान भारतीय संस्कृति के अलग-अलग साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जोकि दर्शाते हैं कि भारत का इतिहास स्वर्णिम रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों ने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया है। आज युवा पीढ़ी को शोध के क्षेत्र में आगे आना होगा, जिससे सभी को वास्तविकता का पता चलेगा। इस मौके पर राज्यपाल ने महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत भी की।
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संगोष्ठी में त्रिनिदाद एवं टोबैगो के हाई कमिश्नर डॉ. रोजर गोपाल, सांसद नायब सिंह सैनी, प्रो. एआर चौधरी, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. संजय मंजूल, प्रो. भाग सिंह बोदला, डॉ. जगत नारायण, संदीप चौधरी, प्रो. मोहन चंद, डॉ. रवि भूषण, एडवोकेट साकेत मंगल, श्याम सुंदर बंसल, भीम सैन अग्रवाल, रोहन मित्तल, आदित्य भारद्वाज, मुनीष कठवाड़, जिला प्रशासन की ओर से पुलिस अधीक्षक मकसूद अहमद, एसडीएम संजय कुमार, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, डीईओ शमशेर सिरोही, सचिव रामजी लाल मौजूद रहे।
खुद को शोध केंद्र के रूप में विकसित करेगा यह विवि : प्रो. भारद्वाज
संगोष्ठी में महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद भारद्वाज ने कहा कि कैथल की पावन धरा वैदिक संस्कृति से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लवकुश तीर्थ पर महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय बनाने के दृष्टिगत हमारी पुरातन और वैदिक सोच को आगे बढ़ाने का काम किया है। यह देश का 18वां संस्कृत विश्वविद्यालय है। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां देने का काम नहीं करेगा, बल्कि खुद को शोध केंद्र के रूप में भी विकसित करेगा। महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ स्थापित करके उनसे जुड़े साहित्य को यहां पर स्थापित करने का काम किया जाएगा।
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