संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। भारत हमेशा ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की भूमि रही है, जहां मानवता और भलाई के संदेशों का प्रसार हुआ। यह देश अपनी सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों, सभ्यता और संस्कृति के लिए विश्व में अलग पहचान रखता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति में नशे के लिए कोई स्थान नहीं है।
ये विचार पैनल अधिवक्ता जीवन सिंह नैन ने राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चीका में नशे के दुष्प्रभावों पर छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि जिस देश को अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों के लिए जाना जाता था, जहां गुरबाणी में तंबाकू तक निषेध था, आज वही देश नशे के भयंकर प्रभावों से जूझ रहा है।
जीवन सिंह नैन ने कहा कि नशे के कारण न केवल युवा पथभ्रष्ट हो रहे हैं, बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है और परिवार बिखर रहे हैं। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएं और अपने परिवार तथा आस-पास के लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में अवगत कराएं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक कुमार और शिक्षिका गुरजीत कौर ने भी छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी और उन्हें जागरूक किया। समझाया नशा गलता नुकसानदेय है।